मच्छमणि रत्न वह रत्न माना गया है जो रत्न यदि सूट हो गया तो सारे रत्नों पर भारी पड़ जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में इसे राहु ग्रह की पीड़ा निवारण हेतु एवं किसी बड़ी भयंकर बाधा रोग क्लेश शत्रु पीड़ा जैसी स्थिति से बाहर निकलने मुक्ति प्राप्त करने हेतु धारण किया जाता है इसके अतिरिक्त राहु ग्रह के आगे पीछे मजबूत ग्रहों का जमावड़ा लगा हो राहु फंसे हुए हो तो भयंकर पीड़ा उत्पन्न करते हैं ऐसी स्थिति से बचने हेतु एवं राहु ग्रह का शुभ फल प्राप्त करने हेतु महत्त्वपूर्ण रुप से धारण किया जाता है।
कमाल कर देगा जम गया यह रत्न तो


मच्छमणि धन सम्पत्ति में अकस्मात् वृहद बढ़ोतरी हेतु किसी चक्रव्यूह से बाहर निकलने हेतु भी धारण किया जाता है
ऐसा भी माना जाता है कि शनि, केतु की पीड़ा शमन में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देता है।
यदि शनि राहु ग्रह साथ बैठें है आगे पीछे भी इनके ग्रह बैठे हुए हैं तो इससे बड़ा फायदा सम्भवतः दूसरा कोई अन्य रत्न बमुश्किल ही दे सकता है। मच्छमणि सम्बंधित जानकारी आप ब्लू लाइन पर टच कर प्राप्त कर सकते है कि कुंडली में ग्रह स्थिति देखकर कैसे इसे धारण करें। धन्यवाद

