ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह की पीड़ा कष्ट को ऐसा बताया गया है कि जो कि व्यक्ति को दुखों कष्टों कीअंतिम सीमा तक लेकर जाते हैं और बर्बादी का ऐसा मंजर दिखाते हैं कि व्यक्ति ता उम्र इन दुखों, कष्टों को भूल नहीं पाता है और राहु ग्रह को किस्मत बदलने वाले सबसे बड़े ग्रह के रूप में भी जाना जाता है अगर किसी व्यक्ति पर यह मेहरबान हो गए तो दुखों के कुएं से निकालकर सुख के महल में लाकर छोड़ देते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में उनकी समस्या के समाधान हेतु अनेकों उपाय बताए गए हैं जातक करते भी हैं और उन्हें फल भी प्राप्त होता है आज हम आप लोगों को उनके आराध्य देव के बारे में बताएंगे जिनकी आराधना उपासना करने से राहु ग्रह अति शीघ्र प्रसन्न होकर मनवांछित फल भी वरदान स्वरुप देते हैं

ज्योतिष शास्त्र में उनके आराध्य देव के बारे में शास्त्रों ग्रंथों पुराणों में थोड़ा संदेह है कहीं पर कोई उनके आराध्य देव रूद्र देव भोलेनाथ और कहीं पर को काल भैरव और पितर देवता को भी इनका आराध्य देवता माना जाता है तीनों नाम अलग-अलग हैं लेकिन शक्ति एक ही है एक ही शक्ति के यह तीन रूप है स्पष्टता शास्त्र निचोड़ में तर्क सहित यह बतलाई जाती है कि जब भगवान विष्णु के चक्र से राहु और केतु भाग रहे थे तो भगवान भोलेनाथ ने ही इनको शरण दी थी और ग्रहों में इन्हें सम्मिलित किया था। दूसरा काल भैरव जो कि उनके आराध्य देव माने जाते हैं भगवान भोलेनाथ की जटाओं से उत्पन्न हुए थे तो राहु का सिर कट जाने के कारण केतु की उत्पत्ति हुई थी। इस कारण से भी काल भैरव को राहु ग्रह का आराध्य देव माना जाता है । राहु केतु ग्रह छाया रूपी ग्रह है भूत प्रेत रूपी ग्रह भी है पितर जिन्हें धरती से जाने के पश्चात छाया रूप या स्मृति रूप में ही याद रखा जाता है या पूजा जाता है


यहां पर को हम इन तीनों रूपों की जो पूजा आराधना राहु ग्रह की शांति हेतु करते है हम किसी रोग से ग्रस्त हैं दुर्घटना का भय बना हुआ है या बार-बार दुर्घटनाएं हमारे साथ हो रही हैं और घर में आंतरिक क्लेश रहता है तो भगवान के रुद्र रूप की पूजा करनी चाहिए नियमित भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाना चाहिए। काल भैरव देव की पूजा अत्यंत ही शुभ व सफल मानी जाती है जब यदि हमारे ऊपर ऋण बढ़ता जा रहा है शत्रु बाधा से हम परेशान हो रहे हैं और कोर्ट कचहरी मुकदमा जेल यात्रा का भय हमें सता रहा हो तो काल भैरव आराधना अत्यंत ही शुभ चमत्कारी फलदाई मानी जाती है

पितरों की आराधना तब अत्यंत सुख फलदाई हो जाती है जब हम पितृ दोष से पीड़ित हो और हमारी अज्ञात बाधाओं का कहीं से भी कोई समाधान नहीं निकल पा रहा हो हमें पता ही ना चल पा रहा हो की समस्या क्या है ऐसी स्थिति में पितर देवता की आराधना अत्यंत ही शुभ व समस्या से मुक्ति प्रदायक मानी जाती है अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें धन्यवाद । उपरोक्त जानकारी तथ्यों को एकत्रित कर प्रसारित की गई है


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