ज्योतिष शास्त्र में जितना महत्व 9 ग्रहों का है उतना ही महत्व उनके निवास स्थान जन्म कुंडली का भी है जन्म कुंडली वह साक्षात् दिग्दर्शिका है जो मनुष्य का सही मार्गदर्शन करती है इसमें स्थित 9 ग्रह मनुष्य जीवन का सुख दुःख, लाभ हानि, उन्नति पतन, आदि सभी कुछ समय समय पर उसके प्रारब्ध,कर्म अनुसार उसे प्रदान करते रहते है।
कलियुग ईश्वर की दी 1 बेशकीमती सौगात है
किन्तु कलियुग में इसे हम वरदान ही समझें कि प्रभु ने हमें इन्हें अपने अनुकूल बनाने का अद्भुत अवसर प्रदान किया हुआ है इन्हें अनुकूल बनाने से हम अपने सुख दुख लाभ हानि उन्नति पतन आदि को भी प्रभावित कर सकते हैं बड़े-बड़े भयंकर कष्टों से राहत प्राप्त कर सकते हैं और जब उन्नति पथ पर हमारे कदम चले तो अपेक्षा से कहीं ज्यादा का लाभ हम इनकी कृपा दृष्टि से अनुकूल बनाते हुए प्राप्त कर सकते हैं

उपाय मन्त्र जाप जड़ी रत्न धारण क्या है सरल
ज्योतिष शास्त्र में इन्हें अपने अनुकूल बनाने के ढेरों उपाय मंत्र जाप जड़ी धारण रत्न धारण आदि कई प्रकार की चीजें बताई गई हैं जो अत्यंत ही इनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करने में लाभकारी मानी गई है उनके क्रोध से बचाव हेतु भी यह अत्यंत ही चमत्कारी मानी गई है आज के दौर में मनुष्य जीवन की कल्पना की जाए तो यहां पर को समय समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और समय को बचाते हुए यदि सरलता से ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति पथ पर कदम रखना चाहता है तो एकमात्र सरल माध्यम रत्न धारण ही यहां पर को है जिसे एक बार धारण करने के पश्चात उसका फल लंबे समय तक बिना कुछ किए प्राप्त किया जा सकता है अन्य उपाय माध्यम नियमित प्रतिदिन नए सिरे से करने पड़ते हैं किंतु यह एक बार धारण हो जाए तो फलदाई होता है दीर्घ समय के लिए।

आखिर कौन सा रत्न दे सकता है भाग्य का साथ
हमारे ज्योतिष शास्त्र में रत्न धारण की जो परंपरा बताई गई है उसके अनुसार सिर्फ और सिर्फ लग्नेश यानी कि प्रथम भाव के स्वामी का दूसरा पंचमेश पंचम विद्या बुद्धि भाव के स्वामी का तीसरा नवम भाव किसे भाग्य भाव भी कहा जाता है इन भावों के स्वामी का रत्न सदा सर्वदा धारण करने की राय दी जाती है इसके अतिरिक्त राशि के स्वामी या रत्न भी सदा सर्वदा धारण करने की राय दी जाती है
1अच्छा ज्योतिष ही सही रत्न राय दे सकता है
इसके अतिरिक्त भी जन्म कुंडली में परिस्थितियां देखते हुए किसी अन्य ग्रह का रत्न भी धारण किया जा सकता है किंतु सदा सर्वदा लग्नेश पंचमेश भाग्येश और राशि स्वामी के रत्न धारण करने का प्रावधान है अब इन भाव के स्वामी व राशि के स्वामी की आपस में तुलना कर यह देखा जाता है कि कौन सबसे ज्यादा शक्तिशाली है और किस की सबसे ज्यादा जरूरत संबंधित कुंडली जातक को है इसके उपरांत ही रत्न धारण करना शुभ माना जाता है एक ही रत्न अकेला व्यक्ति का भाग्य बदल सकता है उसके जीवन को प्रभावित कर सकता है सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है इसके साथ ही कुछ ग्रह जो पीड़ादायक होते हैं उनके रत्न कदापि धारण नहीं करने चाहिए
कुंडली विश्लेषण के सिवा दूजा कोई मार्ग नहीं सही रत्न धारण का
उनसे संबंधित उपाय मंत्र जाप व्रत उपवास आदि करना ही हितकर व लाभकारी माना गया है तो आज उन्हें यह बताने का प्रयास किया कि जन्म कुंडली के अनुसार हम किन भावों के रत्न धारण कर सकते हैं यदि कुंडली विश्लेषण का हम सहारा लें तो हम सिर्फ एक रत्न धारण कर ही अपने जीवन में अत्यंत शुभ सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं इसमें कोई दो राय नहीं। अधिक जानकारी हेतु मुझे क्लिक करें धन्यवाद

