ज्योतिष शास्त्र 1 ऐसा शास्त्र है जिसमें बड़ी से बड़ी समस्या का भी सरल सा समाधान दिया हुआ है जरुरत है हमारे विश्वास की ज्योतिष शास्त्र में।
ज्योतिष शास्त्र में समस्या के सबसे सरल समाधान रत्न शास्त्र में 84 प्रकार के रत्नों का विवरण है जिसमें से सबसे ज्यादा प्रभावशाली 9 रत्नों को बताया गया है बाकी 75 को उपरत्नों की संज्ञा में रखा गया है जो कि रत्नों से कम प्रभावशाली माने जाते हैं किन्तु उपरत्नों में से भी कुछ उपरत्न अत्यंत ही चमत्कारी फल देने वाले माने गए हैं
कैसा ही रत्न हो करने लगेगा कमाल
किन्तु आज हम आपको बताते है कि आपका रत्न हो या उपरत्न यदि वह बेअसर साबित हो रहा है या कुछ भी असर देखने में नहीं आ रहा हो तब आप इसे इस आसान सी विधि के माध्यम से असरकारी बना सकते हैं भले ही वह रत्न आपका नम्बर 1 हो या किसी विशेष लाभ के निमित्त आपने धारण किया हुआ हो इस विधि से तुरंत असर करना शुरू कर देता है
ज्योतिष शास्त्र में गौमाता एवं गोमूत्र का क्या स्थान है यह ज्योतिष जिज्ञासुओं से छिपा नहीं है लेकिन इसके साथ साथ ही बहुत से लोगों को पता ही नहीं होगा कि गौमाता का मल जिसे गोबर भी कहा जाता है यह भी किसी दुर्लभ मणि से कम नहीं।


मनुष्य के लिए भगवान का वरदान है गौमाता
आज आप जानेंगे कि इस चमत्कारी मल से आप किस प्रकार अपने रत्नों को पुनर्जीवित कर चमत्कारी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब आपका रत्न बेकार बेअसर हो जाए किसी काम का नहीं रहे तब आप इसे गौमाता के मल में पूरी तरह से बंद कर दें मल से बाहर रत्न दिखाई नहीं देना चाहिए ऐसी अवस्था में इसे घर में ईशान कोण में सुरक्षित जगह पर रख दें और 18 दिनों तक ऐसे ही रहने दें नियमित रत्न समक्ष पूजा पाठ करते रहें।18 दिनों के पश्चात शुभ समय में इसे गौमाता के मल से बाहर निकालकर प्राण प्रतिष्ठा शुद्धि करण पूजा विधि करने के पश्चात रत्न मूहूर्त जो रत्न धारण करने का समय हो उस समय पर इसे धारण कर लें।
जिसे समझा कबाड़ उसी ने किया बेड़ा पार

आप देखेंगे कि जिस रत्न को बेअसर बेकार समझ कर हमनें निकाल दिया वो ही अब हमारी कस्ती को पार लगाने लगा है हैरत में पड़ जाएंगे आप जब गौमाता के मल से निकलकर यह इतना चमत्कारी कैसे हो गया। यदि आपका रत्न भी बेअसर साबित हो रहा है तो अवश्य ही इस विधि को जरूर आजमाएं पता चल जाएगा कि क्यों आखिर पूजा के समय गौमाता के गोबर से ही भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है और भी कई दुर्लभ सिद्धि प्राप्त करने हेतु भी धरती पर इसका कोई जवाब नहीं है।
आज का विषय यदि आप लोगों को पसंद आए तो इसे जरूर आगे बढ़ाकर share करें धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें

