Dev Guru brihaspati-: गुरुवार को अपने घर पर लेकर आए यह 3 चीजें आपकी किस्मत की नैया पार नहीं लगाई गुरु ग्रह ने तो फिर कहना
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जानकारी है देवताओं के गुरु देव गुरु बृहस्पति (Dev Guru brihaspati) से संबंधित आज हम एक ऐसा उपाय देवगुरु बृहस्पति का बताएंगे जिस उपाय के माध्यम से आप देवगुरु बृहस्पति की भयंकर से भयंकर पीड़ा से भी मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं और देवगुरु बृहस्पति का चमत्कारी फल भी आप प्राप्त कर सकते हैं की देवगुरु बृहस्पति जब व्यक्ति से महा कुपीत जाते हैं
तभी उसे भीषण परेशानियां आती है कष्ट भीषण अपदा में डालते हैं देवगुरु बृहस्पति अन्यथा देवगुरु बृहस्पति एकदम से किसी भी व्यक्ति को पीड़ा नहीं पहुंचते हैं क्योंकि वह देवताओं के गुरु कई बार जातकों को क्षमा करते हैं या तो प्रारब्ध की बहुत खराब कर्मों के कारण या इस जन्म के खराब कर्मों के कारण ही हमें देवगुरु बृहस्पति की पीड़ा का सामना करना पड़ता है

जन्म कुंडली में यदि देवगुरु बृहस्पति की स्थिति खराब हो मकर यानी की नीच राशि वाले जातकों वहां पर को देवगुरु बृहस्पति बैठे हो या फिर गुरु चांडाल योग राहु केतु के साथ चांडाल योग बनाया हुआ हो इन स्थानों पर शत्रुघ्रही रही हो तभी देवगुरु बृहस्पति (Dev Guru brihaspati)की पीड़ा हमें प्राप्त होती है देवगुरु बृहस्पति को कुलगुरु के नाम से भी जाना जाता है कुल देवता, इष्ट देवता, पितृ पूज्य देवता,
देवगुरु बृहस्पति के उपाय – (Dev Guru brihaspati ke upay ) ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है बृहस्पतिवार के दिन किया जाने वाला आप एक पीला वस्त्र ले आए ऐसा पीला वस्त्र जिससे पुस्तक पूरी तरह से बंद हो और उसमें गांठ आदि लग जाए और इसके साथ-साथ ही आप एक धार्मिक पुस्तक गीता , रामायण ,हनुमान चालीसा ,सुंदरकांड ,बजरंग बाण, दुर्गा चालीसा ,गणेश चालीसा, शिव चालीसा, कोई भी धार्मिक पुस्तक जिसमें आपका सबसे ज्यादा लगाव है उसे धार्मिक पुस्तक को गुरुवार के दिन ही लेकर आए और गुरुवार के दिन ही एक चौकोर जैसे पाशा होता है उसी आकृति का पतला सा सोने का टुकड़ा जिसमें हरि शब्द लिखा जाए उसमे लिखना है और इसके साथ-साथ ही हल्दी का पत्ता हल्दी का वह पत्ता जो पीलापन लिए हुए हो इस पत्ते को भी आप इसी आकृति में कांट ले पाशे की आकृति के रूप में अगर पत्ता नहीं मिलता है तो कच्ची हल्दी को भी चौकोर काटते हुए जिसमें हरि शब्द लिख दिया जाए यह उपाय गुरुवार के दिन ही करना है अब इस चीज पर अष्टगंध से अनार किया आम की कलम से हरि शब्द भगवान विष्णु का कोई भी नाम आप लिख सकते हैं
इन चीजों के ऊपर थोड़ा सा गंगाजल, गोमूत्र का छिड़काव कर लीजिए क्योंकि वह बहुत चीजों से लगकर होकर आएंगे तो उसमें गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव कर उसे पर हरि लिख दीजिए और जो कपड़ा आप मार्केट से लेकर आए हैं किसी भी शुक्ल पक्ष का बृहस्पतिवार कपड़े को धो लें उसको शुद्ध कर गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव कर अपने मंदिर पर रखिए उसके ऊपर धार्मिक पुस्तक रखिए धार्मिक पुस्तक के पहले पन्ने को खोलते हुए जो सोने के टुकड़े में आप ने हरि लिखा है दोनों ओर हल्दी का पत्ता जिसमें अपने हरि लिखा है उसको रख दीजिए अब इसके साथ-साथ ही यदि आप किसी भयंकर पीड़ा से पीड़ित हैं गुरु ग्रह के कारण चल रही है संतान नहीं हो पा रही है विवाह नहीं हो पा रहा है कोई भयंकर रोग लग गया है
रोजगार नहीं मिल पा रहा है या व्यापार निम्न स्तर पर चला गया है या कोई कोर्ट कचहरी संबंधित बधा से मुक्ति नहीं मिल पा रही है शत्रु बाधा सर पर चढ़कर बोल रही है चारों ओर से शत्रुओं ने घेर रखा है या कोई भी किसी भी प्रकार की बाधा है उसे एक सादे पन्ने पर उसमें भी गंगाजल गोमूत्र का छिड़काव कर उसमें अष्टगंध आदि का प्रयोग नहीं करना है किसी भी चीज से लिखकर प्रार्थना कि मुझे इससे मुक्ति मिल जाए अपनी समस्या लिखिए समाधान हेतु प्रार्थना करिए उसे अंतिम किताब का लास्ट पन्ना जब खत्म हो जाती है
लास्ट में वहां उसको रख दीजिए अब इसको आप पैक कर दीजिए बिल्कुल बंद करके कपड़ा लगाकर गांठ पड़ दीजिए अब उसमें आपको सूरजमुखी या फिर चमेली का प्रतिदिन उसमें अर्पित करिए और वहां पर को भगवान हरि विष्णु के किसी भी मंत्र का जैसे ओम नमो भगवते वासुदेवाय या फिर कृष्णाय नमः किसी भी मंत्र का आप जा करिए दो माला पांच माला यह आप पर निर्भर करता है
बस ध्यान इस बात का दीजिएगा यदि आपने तीन माला कर दिए हैं उसके बाद एक माला नहीं होगी तीन माला से बढ़ेगी नहीं कटेगी नहीं प्रतिदिन आपने तीन माला करनी है या फिर एक ही माल अपने समय को देखते हुए करिए या शाम करिए एक निश्चित समय बना लीजिए उसे समय पर प्रतिदिन आप जाप करिए प्रातः काल या सायं काल यदि चमेली और सूरजमुखी का फूल आपको प्राप्त नहीं हो पता कोई भी पीले रंग का फूल या फिर सिंदुरी कलर का फूल आप उसे पर प्रतिदिन अर्पित करना है रोज एक-एक फूल पुस्तक के ऊपर पे रखना है दूसरे दिन फूल मुरझा जाते हैं नया फूल रखकर मुरझाए हुए फूल को बहते हुए जल में छोड़ देना है किसी पवित्र जड़ में भी आप उसे छोड़ सकते हैं
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