आंख मूंद कर धारण करें गोमेद यदि बैठे हैं राहु ग्रह इन 4 स्थानों पर||

नमस्कार स्वागत है आप सभी लोगों का गायत्री ज्योतिष केंद्र में आज आप लोगों के लिए हम नवग्रहों में महत्वपूर्ण ग्रह का स्थान रखने वाले ग्रह जिससे कि अक्सर लोग भय रखते हैं डरते हैं और गलत काम करने से बचते भी है ऐसे ग्रह राहु ग्रह के बारे में ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं ऐसी बातें जो आपको हैरान कर दे राहु ग्रह वह ग्रह है जो वह दे सकते हैं दूसरा कोई भी ग्रह प्रदान नहीं कर सकता है छप्पर फाड़ के दे देते हैं अपने भक्तों पर यदि प्रसन्न हो जाए राहु ग्रह तो अक्सर राहु ग्रह की कुंडली में स्थिति को देखते हुए ज्योतिषी व्यक्ति को सतर्क रहने के लिए बोलते हैं कारण कि राहु ग्रह को दंड देने वाले ग्रह के तौर पर भी देखा जाता है व्यक्ति के कर्मानुसार। कारण व्यक्ति समय-समय पर जप दान पूजा-पाठ रत्न धारण और भी कई चीजें सब समय समय पर करवाते रहता है

  • गोमेद धारण जन्म कुंडली के अनुसार ही करना चाहिए

राहु ग्रह के बारे में ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है राहु ग्रह की स्थिति यदि जन्मकुंडली में अनुकूल हो तो व्यक्ति ने अवश्य ही गोमेद रत्न धारण करना चाहिए तो आज के एपिसोड में हम आप लोगों को यही बताएंगे कि किन परिस्थितियों में राहु ग्रह का रत्न गोमेद जन्म कुंडली की स्थिति देखते हुए धारण किया जा सकता है अक्सर ज्योतिष शास्त्र के बड़े बड़े ज्योतिषी भी राहु के रत्न गोमेद को जातक को धारण करवाने से बचते हैं कारण इसका खराब प्रतिफल नकारात्मक प्रतिफल भी देखने में आता है किंतु ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है 

  • इन 4 स्थानों पर सिर्फ राहु ग्रह ही कारक व फलदाई है अन्य कोई ग्रह नहीं

यदि जन्मकुंडली के इन चार स्थानों पर राहु हो तो गोमेद रत्न आंख मूंदकर धारण कर लेना चाहिए हम आप लोगों को बताएंगे कि वह 4 स्थान कौन से हैं जहां पर को राहु ग्रह का रत्न गोमेद आंख मूंदकर धारण किया जा सकता है किंतु इससे पूर्व आप लोगों को एक बात और हम बताएंगे जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु ग्रह की स्थिति अनुकूल होती है वह व्यक्ति को फल देने की स्थिति में होते हैं और व्यक्ति उनका रत्न धारण करने की स्थिति में होता है तो अन्य ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल रहती है यानी कि उनके रत्न धारण की स्थिति व्यक्ति के जन्म कुंडली में ना के बराबर बनती है

  • अकेला राहु ग्रह जो फल प्रदान करता है दूसरे 8 ग्रह मिलकर भी प्रदान नहीं कर सकते

 अकेले ही राहु ग्रह इतने बलशाली होते हैं कि वह व्यक्ति को सब कुछ देने की स्थिति में होते हैं यह स्थिति इन्हीं चार स्थानों पर विशेष तौर पर बनती है इनमें पहला स्थान है

  • इस स्थान पर पित्र दोष नाशक माना जाता है राहु को

 लग्न पहला घर यदि यहां पर को राहु हो तो आंख मूंद कर गोमेद रत्न धारण कर लेना चाहिए यहां पर को राहु ग्रह कलेश कारक स्वास्थ्य बाधा कारक साथ में पितृदोष कारक भी माना जाता है तो यहां पर को अनिवार्य तौर पर राहु का रत्न गोमेद धारण करने से यह सभी प्रकार का दोष समाप्त हो जाता है एवं अन्य जप दान पूजा पाठ भी समय-समय पर जातक द्वारा यदि की जाए तो हमेशा के लिए यह दोष समाप्त हो जाता है दूसरा स्थान बताया गया है

  • बिगाड़ के रख देते हैं मानसिक संतुलन यदि पंचम भाव में बैठ जाए राहु ग्रह तो

 पंचम भाव पंचम भाव में यदि राहु ग्रह बैठे हुए हो तो यह विद्या में रुकावट कारक मोटी बुद्धि कारक संतान संबंधी समस्या कारक एवं निर्दयता कारक माना जाता है और यह भी कहा जाता है कि ऐसे जातक का मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहता है अतः यहां पर भी राहु ग्रह के रत्न गोमेद को पहनने का प्रावधान बताया गया है बताया गया है कि गोमेद रत्न धारण करने से और राहु ग्रह संबंधी अन्य उपासना उपाय करने से यह दोष एवं अन्य किसी प्रकार का दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है तो अवश्य ही पंचम स्थान में राहु हो तो आंख मूंदकर गोमेद रत्न धारण करना चाहिए अब बात करते हैं

फकीरकी भी लकीर बदल दें यदि बैठ जाएं भाग्य भाव में राहु ग्रह तो

नवम स्थान जो कि काफी महत्वपूर्ण स्थान है भाग्य स्थान नवम स्थान इस स्थान पर यदि राहु ग्रह हो तो यह सदा सर्वदा भाग्य में रुकावट कारक माने जाते हैं हमेशा व्यक्ति को असफलता की ओर धकेलते हैं अंतिम समय में व्यक्ति के हाथ से उसकी मेहनत निकल जाती है और व्यक्ति खाली हाथ रह जाता है ऐसा फल यहां पर को राहु ग्रह प्रदान करते हैं एवं अपयश कारक भी राहु को यहां पर को माना जाता है और माना जाता है कि ऐसे व्यक्ति के जीवन को राहु ग्रह पूर्ण तरह से तहस-नहस करने में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहने देते हैं तो अवश्य ही राहु ग्रह संबंधित उपाय उपासना अवश्य ही करनी चाहिए और बिना किसी से पूछे यदि यहां पर को राहु बैठा हो तो अवश्य ही गोमेद रत्न धारण कर लेना चाहिए चमत्कारिक प्रतिफल ऐसे जातक से कभी दूर नहीं रह सकता है

  • साधारण मनुष्य को असाधारण मनुष्य इसी भाव पर बैठ कर राहु ग्रह बनाते हैं

अब बात करते हैं अंतिम स्थान जहां पर को राहु ग्रह सबसे ज्यादा व्यक्ति को पीड़ित करते हैं दशम स्थान दसवा भाव इस स्थान पर माना जाता है यदि राहु ग्रह बैठ जाए तो ऐसे व्यक्ति के पिता के साथ कभी भी संबंध मधुर नहीं रहते हैं ऐसा व्यक्ति पिता से अक्सर दूर ही रहता है और जीवन में अथक प्रयास के बावजूद भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है राजपद हाथ से निकल जाता है मान-सम्मान हाथ से निकल जाता है यश प्रतिष्ठा वैभव कुछ भी व्यक्ति के पास नहीं बचता है कहा जाता है जिस के दसवें भाव में राहु बैठ जाता है तो अवश्य ही यहां पर को राहु ग्रह बैठ जाए तो गोमेद रत्न जरूर धारण करें और सबसे ज्यादा चमत्कारिक प्रतिफल राहु ग्रह का दशम भाव में ही देखने में आता है यदि व्यक्ति के अनुकूल राहु ग्रह हो जाए तो राजनीति कला खेल आदि क्षेत्रों में ऐसा व्यक्ति उल्लेखनीय कार्य करता है व नाम रोशन करता है साथ ही साथ बढ़े ओहदे पदों पर भी राहु ग्रह प्रभावित व्यक्ति ही उसकी गरिमा के साथ न्याय कर सकता हैं

  • ध्यान रखने वाली बात यह है कि गोमेद रत्न का भार आपके अनुकूल होना चाहिए

तो इन चार भावों में यदि राहु ग्रह बैठ जाए तो अवश्य ही हम तो यही कहेंगे कि आंख मूंदकर बिना किसी से कुछ पूछे गोमेद रत्न अवश्य ही धारण करें ज्योतिषी राय अनुसार रत्ती व कैरेट का निर्धारण कर ले एवं राहु ग्रह संबंधित उपाय उपासना मंत्र जाप यंत्र धारण आदि अवश्य ही करें एक बात आपको यहां पर को हम अवगत करा देंगे कि यदि राहु ग्रह आपके अनुकूल हो गए तो यह जीवन ऐसे जातक का धन्य हो जाता है तो यह जानकारी यदि आप लोगों को पसंद आई तो आगे बढ़ाकर से यार आप अवश्य ही करें धन्यवाद

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