डर के साए में बीतता है जीवन भय कभी दूर नहीं होता

अन्नतं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा। एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् सायड्काले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।
कर्कोटक कालसर्प योग जब जन्म कुंडली के आठवें भाव में राहु ग्रह और द्वितीय भाव में केतु ग्रह हो और सभी ग्रह इनके बीच आ जाए तो कर्कोटक कालसर्प योग बनता है इस कालसर्प योग वाले जातकों हमेशा ही किसी न किसी प्रकार का रोग व्याधि हमेशा ही घेरे रहती है दुर्घटना के साथ साथ कभी मृत्यु भय भी बने रहता है

ऊपरी बाधा जादू टोने का भय बना रहता है

ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में ऊपरी बाधाओं छल छिद्र जादू टोना से भी गर्सित रहता है अर्थ हानि, व्यापार में भी नुकसान उठाता है नौकरी में हमेशा ही परेशानी का बना रहना अपने आला अधिकारियों के साथ मनमुटाव, पद से आगे नहीं बढ़ पाना मित्रों से नुकसान एवं साझेदारी में धोखा मिलता है

रोग भय शत्रु भय में बीतती है जिन्दगी

रोगों की अधिकता, शल्यक्रिया आपरेशन का डर हमेशा ही बना रहता है इसके साथ ही साथ जब अत्यधिक खराब स्थिति में यह योग हो जहर प्रकोप से से मृत्यु या फिर अकाल मृत्यु भी इस योग में देखी गई है। इस योग की शान्ति हेतु बताया गया 1 मात्र उपाय यह है प्रतिदिन काली गाय को गुड़ रोटी काले तिल एवं उड़द भिगो कर खिलायें जिससे इस योग के दुष्प्रभाव से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो द्वारा देखने हेतु ब्लू लाइन शब्दों को टच करें धन्यवाद

3 thoughts on “डर के साए में बीतता है जीवन भय कभी दूर नहीं होता”

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