नमस्कार गायत्री ज्योतिष केंद्र में आप सभी लोगों का स्वागत है आप आप लोगों के लिए हमेशा ही ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी के एपिसोड हम समय-समय पर प्रसारित करते रहते हैं ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई हर प्रकार की जानकारी हम आप लोगों के लिए लेकर आते हैं जानकारी ऐसी की जिस पर यदि आप अमल करते हैं तो उसका प्रतिफल आप अवश्य ही देखते हैं आज भी हम आप लोगों के लिए ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं जानकारी है शुक्र ग्रह से संबंधित आज हम आप लोगों को बताएंगे कि शुक्र ग्रह अगर चार भाव में बैठ जाए तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन रुकता नहीं है उसके हाथ में विशेष तौर पर शुक्र यदि बहुत कमजोर हो जाए या वक्री का अर्थ होता है कि जब गृह उल्टी चाल चलता है या फिर अत्यंत कमजोर हो जाए जैसे की कन्या के शुक्र हो जाए या शत्रु ग्रही हो जाए तो वहां पर को उसे स्थिति में और उसके साथ एक स्थिति यह भी बताई गई है ज्योतिष शास्त्र में कि अगल- बगल यदि केतु वह चंद्रमा हो तो समझ लीजिए कि व्यक्ति के हाथ में धन कभी दिखता ही नहीं जैसे ही आएगा वैसे ही निकल जाएगा व्यक्ति हमेशा धन के लिए परेशान रहता है क्योंकि शुक्र को माता लक्ष्मी का कारक माना जाता है धन का कारक माना जाता है और शुक्र ग्रह की स्थिति यदि जन्म कुंडली में अच्छी होती है मजबूत होती है बाकी अन्य ग्रहों की स्थिति कितनी ही कमजोर क्यों ना हो लेकिन व्यक्ति को कभी धन के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता कहीं ना कहीं उसके जीवन में धन की कमी जो रहती है वह किसी न किसी तरीके से पूर्ण हो ही जाती है.
लेकिन अगर इन चार भाव जिनके बारे में आज अभी हम आपको बताएंगे यहां पर को कुछ शुक्र बैठ जाएं और विशेष तौर पर वक्री होकर बैठ जाएं और या अत्यंत कमजोर स्थिति में होकर बैठ जाए या उनके अगल-बगल इनका संबंध चंद्रमा या केतु से हो जाए तो मान के चलिए ज्योतिष शास्त्र की कई पुस्तकों में लिखा हुआ है और यह कई वर्षों के अनुभव के साथ हम भी देखते हैं पत्र कुंडली विश्लेषण करते हैं तो वहां पर को देखा जाता है कि जो जातक की कुंडली में ऐसा होता है तो उसके जीवन में वह यही बताते हैं कि कभी पैसा रुकता ही नहीं है बड़ा पैसा आता है चला जाता है हमेशा पैसे के लिए हमें तंगी रहती है यहां तक की कर्ज लेना पड़ता है वह कर्ज भी पूरा होता ही नहीं है कर्ज ही कर्ज मैं व्यक्ति चलते रहता है वह चार स्थान कौन से हैं पहले तो है धान भाव दूसरा भाव यहां पर को यदि शुक्र बैठ जाए वैसे भी दूसरा भाव होता है दो यानि की वृषभ राशि मानी जाती है.
उनके स्वामी शुक्र ही होते हैं लेकिन यहां पर को दूसरे भाव में यदि शुक्र वक्री होकर बैठ जाए तो समझ लीजिए कि पैसा उल्टा हो जाता है यानी कि आएगा कहीं ना कहीं वह घूम जाएगा यानि पहले तो आते आते ही वह रास्ते से ही निकल जाता है ऐसा भी देखा जाता है कि व्यक्ति तक पहुंच नहीं पता है पहुंच भी गया तो ज्यादा समय उसके हाथ में बहुत रुकता नहीं है जैसे तैसे व्यक्ति को अपना जीवन यापन करना पड़ता है यह तो सभी लोग जानते हैं कि दूसरा भाव धन का भाव होता है और धान भाव में यदि वक्रीय ग्रह या कोई कमजोर ग्रह और विशेष तौर पर शुक्र जैसा ग्रह बैठ जाए तो तंगी का सामना करना ही पड़ेगा साथ ही साथ परिवार भाव होता है क्योंकि परिवार का भरण-पोषण धन से ही होता है और यदि हम समझ में कहीं इधर-उधर जाते हैं मित्र आदि के साथ यदि कहीं पर हम कोई संबंध आदि हमारे रहते हैं तो वहां पर को भी धन का इस्तेमाल होता है तो हर जगह व्यक्ति को धन की कमी देखने में आता ही आती है तो ध्यान रखिएगा कि यदि वक्रीय शुक्र यहां पर को बैठा हुआ है या कमजोर शुक्र यहां पर को बैठा हुआ है या शुक्र के अगल-बगल मान के चलें यहां पर को केतु बैठ गए हैं या यहां पर को चंद्रमा बैठ गए हैं या किसी प्रकार से संबंध बन गया है शुक्र का कहीं सप्तम में या इधर-उधर या साथी बैठ गए हैं तो लिख कर ले लीजिए आप जीवन में धान की तो समस्या बनी रहेगी अंत समय तक तो इसके लिए उपाय करेगा उपाय भी हम हमारे चैनल पर काफी अच्छे-अच्छे उपाय दिए गए हैं.
शुक्र ग्रह संबंधित और आगे को भी हम लेकर आएंगे तो पहले भाव तो हो गया धन भाव दूसरा भाव वही पंचम भाव पंचम भाव बुद्धि का भाव होता है यहां पर को भी यदि शुक्र बैठ जाते हैं वक्रीय होकर बैठ जाते हैं पंचम भाव में तो बुद्धि का भाव है बुद्धि उल्टी हो जाती है पैसा आएगा कहीं ना कहीं दिमाग को ऐसा घुमा देगा कि वह इधर-उधर चला जाएगा या गलत जगह पर चला जाएगा गलत जगह पर इन्वेस्ट हो जाएगा हमने यहां तक देखा है बहुत से लोगों की जन्म कुंडली में विश्लेषण करते समय की आदमी के पास बहुत अच्छा पैसा होता है लेकिन पंचम भाव में वक्री शुक्र या कमजोर शुक्र या इनका संबंध चंद्रमा या केतु से होने से व्यक्ति के पास बुद्धि के कारण आया अच्छा खासा पैसा भी उसके हाथ से निकल जाता है या कहीं वह फस जाता है पैसा या किसी को दे देता है जैसे कहते हैं कि इसको मोह लिया है इसको मूल लिया है इसके ऊपर कोई जादू टोना कर दिया है तो व्यक्ति बताते हैं कि पता नहीं क्या हो जाता है हमें की पैसा तो आया लेकिन जैसे ही आया तो फलाना आदमी आया जबकि हम उसको देना ही नहीं चाहते थे और हमने उसको दे दिया या हमने ऐसी जगह पर जहां पर हम लगाना ही नहीं चाहते थे हमारे मन में पता नहीं कौन सा विचार आया पता नहीं किस ग्रह ने कौन सा खेल खेल की हमने वह पैसा वहां पर लगा दिया और वह पैसा फंसा हुआ है और आज तक रो रहे हैं.
कोर्ट कचहरी आदि में फंसे पड़े हुए हैं तो ध्यान रखिएगा की पंचम भाव विद्या बुद्धि का भाव होता है तो बुद्धि अगर सही है तो छोटा पैसा भी बहुत बड़ा बन जाता है तो बुद्धि के अनुसार और यदि बुद्धि वक्री हो गई क्योंकि शुक्र वक्री है यहां पर को कमजोर स्थिति में तो बड़ा पैसा भी छोटा यानी की है ही नहीं समझ लो है कहीं है जब अपने हाथ में पैसा नहीं है तो फिर वह किस काम का जरूरत के समय अगर हमारे पास पैसा हमें नहीं मिला तो पैसा किस काम का और यहां पर को तो पैसा फंसा हुआ है निकालने के लिए आदमी को कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है कोर्ट कचहरी तक आदमी को जाना पड़ रहा है तो पंचम भाव में भी यदि वक्री है शुक्र कमजोर शुक्र या चंद्रमा या केतु के साथ बना हुआ इसका संबंध हो तो समझ लीजिए इसके साथ मान के चलो सकता शुक्र केतु बैठ गए चंद्रमा बैठ गए होने के लिए शुक्र चंद्र का योग लक्ष्मी योग के भीतर भी आता है अच्छा योग माना जाता है लेकिन नहीं शुक्र वक्री कमजोर शुक्र निचत शुक्र कन्या राशि का शुक्र हो तो समझ लीजिए कि उल्टा ही होगा देख लीजिएगा आप लोगों की जन्म कुंडली में भी किसी प्रकार का अगर ऐसा योग होगा तो आप यही बात हो रही होगी अगला भाव है भाग्य भाव नवम भाव यहां पर को शुक्र बैठ जाए वक्री होकर तो भाग्य ही लगा लीजिए वक्री माने उल्टा अच्छा खासा भाग्य भी उल्टा हो जाएगा सही मार्ग में चल रहे हैं.
हम लेकिन बुद्धि हमारी वह हो गई क्या कहते हैं वक्र यानी की उल्टी हो गई तो समझ लो मार्ग ही गलत हो गया सही मार्ग में जाते-जाते लोगों ने वहां पर बहुत कुछ कमाया लोगों ने बहुत अर्चन किया लेकिन हम कुछ नहीं कर पाए क्योंकि हमारा शुक्र ही वक्री हैं शुक्र ही कमजोर है ऊपर से केतु के साथ संबंध हो सकता है हो गया हो चंद्रमा के साथ संबंध हो गया होगा तो लिख कर ले की मतलब यहां पर को आदमी के हाथ में आया हुआ पैसा भी चला जाएगा धन की जीवन में कमी बनी ही रहेगी भले ही वह अरबपति आदमी क्यों ना हो संपत्तियां होगी लेकिन धन नहीं होगा जैसे ही धन आएगा कहीं पर कोई जरूरत के लिए तो चला जाएगा संपत्ति बचना चाहेंगे वह भी नहीं बिकेगी हमने देखा है बहुत से लोग यहां पर को जिन लोगों का ऐसा रहता है क्योंकि हम तो कई सालों से कुंडली विश्लेषण कर रहे हैं तो वह लोग बताते हैं कि हमारी संपत्ति भी नहीं बिकती है जबकि बगल वाले की कुछ भी संपत्ति नहीं है वह हमसे अच्छे दामों में बेज दे रहा है और हमें कौड़ी के दाम भी नहीं मिल रहे हैं आदमी आ रहा है बिल्कुल बात करके चला जा रहा है यह वक्री शुक्र का खेल होता है वक्री यानी कि उल्टा चलने वाला या फिर बहुत कमजोर स्थिति यानी की कन्या राशि का हो या फिर केतु के साथ या चंद्रमा के साथ संबंध बन गया हो या चारों ओर से कुछ ऐसी स्थितियां भी होती है जन्म कुंडली यही स्थितियां नहीं की शुक्र के कमजोर होने की और भी कई स्थितियों रहती हैं तो ऐसी स्थिति में अगर भाग्य भाव में शुक्र हो तो उपाय अवश्य कर लेना चाहिए क्योंकि देखो एक बार उपाय कर लेंगे तो आगे को तो कम से कम समाधान मिलेगा नहीं करेंगे तो वह स्थितियां बनते रहेगी बढ़ते जाएंगे स्थितियां कभी भी काम नहीं होती हैं.
अगर हम समाधान नहीं करेंगे किसी भी समस्या का तो समस्या बढ़ती जाती है और समाधान करेंगे तो धीरे-धीरे कम होते हुए एक समय पर समस्या नष्ट हो जाती है तो कभी भी ऐसी स्थिति हो तो समाधान अवश्य ही कर लेना चाहिए अगला भाव बताया गया है लाभ भाव एकादश भाव जिसे लाभ का भाव कहा जाता है यहां पर को भी शुक्र को वक्री माना वक्री होना बहुत ही खराब माना जाता है बहुत खराब इन तीनों भावो से ज्यादा ज्यादा खराब हो तो यहां पर को देखा जाता है जैसा ज्योतिष शास्त्र में बताया गया श्री माल जी की कई किताबें जो पुराने श्री माल जी थे उनकी किताबों में है कई वर्णन कई हमारे होरा शास्त्रों में लिखा हुआ है तो यहां पर को भी यदि एक शुक्र बैठा हो तो समझ लीजिए कि आदमी को वाला भी नहीं होता है कहीं पर को उसका बहुत बड़ा लाभ हुआ है लेकिन वह लाभ उसके पास तक नहीं पहुंच पाता है.
रास्ते में ही वह लाभ उसका गायब हो जाता है हाथ में आया हुआ धन खाने का अर्थ है कि उसके पास जो उसने पूजी जो लाभ उसने इकट्ठा किया वह उसके मुट्ठी में नहीं समा पता किसी न किसी तरीके से पहले ही निकल जाता है और व्यक्ति देखते रह जाता है जैसा हमने बताया कि कहीं पर को आया होगा दिमाग हमारा घूम गया और हमने किसी को दे दिया या कहीं पर को हमने इन्वेस्ट कर दिया और इस ऐसी जगह पर इन्वेस्ट किया ऐसी जगह पर पैसा लगा दिया या ऐसी जगह पर पैसा दे दिया जहां से हमें मिलने की उम्मीद ही नहीं होती है ना हम लगे रहते हैं प्रयास करते रहते हैं कि मिलेगा लेकिन एक स्थिति ऐसी आती है कि हम प्रयास करना ही छोड़ देते हैं हमने यहां तक देखा है कि ऐसी स्थिति में लोग कोर्ट कचहरी में लगे रहते हैं कहीं पर को ऐसी जगह पर पैसा फस जाता है कि जहां से तो फिर निकलना ही मुश्किल हो जाता है कई ऐसी प्रॉपर्टी में आदमी पैसा फसा देता है कि जो प्रॉपर्टी अपने आप में पहले से ही विवादित होती है और व्यक्ति ऐसी समस्याओं में फंस जाता है क्योंकि सही इस्तेमाल होकर ही नहीं पता है यहां से संबंध भी पंचम भाव से बनता है.


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