दुःखी जीवन, शत्रु बाधा, वाणी दोष, अनिद्रा,भय ग्रस्त स्थिति यदि आए जीवन में देखने पर आंख मूंदकर धारण करें राहु ग्रह का प्रिय रत्न गोमेद।

ज्योतिष शास्त्र 1 ऐसा शास्त्र है जिसके माध्यम से व्यक्ति विशेष अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उसे खुशहाल बना सकता है जरुरत है ज्योतिष शास्त्र में विश्वास की। ज्योतिष शास्त्र में अपनी समस्या को दूर करने का व जीवन में खुशहाली लाने का 1 सरल तुरन्त फलदाई तरीका है रत्न धारण। जिस ग्रह से सम्बन्धित समस्याएं हैं अक्सर उसी ग्रह का रत्न धारण करने का प्रावधान है किन्तु रत्न धारण गंभीर समस्या कष्ट को देखते हुए भी धारण करने का प्रावधान भी बताया गया है जैसे मन यदि अत्यधिक चंचल क्रोध अत्यधिक हो तो मोती धारण करना चाहिए बच्चा या अन्य मंद बुद्धि हो तो पन्ना धारण करना चाहिए ऐसे ही अन्य ग्रह की विशेषताओं उनसे संबंधित समस्याओं के कारण भी रत्न धारण करने का प्रावधान है आज इस लेख में आप लोगों को हम बताएंगे कि राहु ग्रह के रत्न गोमेद को किन परिस्थितियों वास्तविकता ओं समस्याओं को देखते हुए हम आंख मूंदकर धारण कर सकते हैं

जब उठ जाए स्वयं से विश्वास तो आंख बंद कर धारण करें गोमेद रत्न

 पहला बताया गया है पहला बताया गया है कि यदि व्यक्ति स्वयं से परेशान है दुखी है सब कुछ होते हुए भी उसे लगता हो कि जीवन में सुख का अभाव है जीवन में नीरसता है और स्वास्थ्य में भी अज्ञात कष्ट अज्ञात रोग जो कि पकड़ में ना आए ऐसा बना रहता हो इस बारे में व्यक्ति किसी और को बता भी ना पाता हो और भी बहुत सी ऐसी परिस्थितियां होती है जिस कारण व्यक्ति सभी प्रकार के सुख संसाधन होते हुए भी हमेशा दुखी रहता है यह परिस्थितियां राहु ग्रह के कारण उत्पन्न होती हैं अतः ऐसी किसी भी परिस्थितियों में राहु ग्रह के रत्न गोमेद को आंख बंद कर धारण अवश्य कर लेना चाहिए

मुंह से निकलते हैं गलत शब्द तो गोमेद लगाता है विराम

दूसरा बताया गया है वाणी दोष वाणी कटुता इसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति के मुख से हमेशा ही अभद्र भाषा, गलत गाली गलौज, क्रोधी क्रूर, भाषा निकलती हो जिसे सुन ना कोई भी पसंद ना करता हो और ऐसी भाषा बोलने वाले व्यक्ति से हमेशा ही लोग दूरी बनाना पसंद करते हो यदि जातक को महसूस होता हो की मेरे मुंह से हमेशा ही गलत शब्द लगातार निकलते हैं संयम रखने के बावजूद भी। और लोगों ने भी मुझ से दूरी इसी कारण से बनाना यदि प्रारंभ की हुई है तो बिना कुछ सोचे समझे हमें यह मान लेना चाहिए यह तो सिर्फ और सिर्फ राहु ग्रह के कारण उत्पन्न होता है ऐसी परिस्थिति में गोमेद रत्न धारण करना ही सर्वश्रेष्ठ उपाय रहता है क्योंकि वाणी में संयम और वाणी को सरलता मिठास प्रदान करता है।

भय ग्रस्त हो गया है जीवन तो भय दूर करता है गोमेद

तीसरा अत्यंत महत्वपूर्ण है यदि व्यक्ति के जीवन में कोर्ट कचहरी से संबंधित समस्याएं चल रही है और भय है कि अपने मूल स्थान को कहीं छोड़ कर जाना ना पड़े। परदेस गमन का भय और राज भय कहा गया है ऐसा व्यक्ति के साथ हो तो यह राहु ग्रह के कुपित होने के कारण माना जाता है कि व्यक्ति हमेशा ही किसी ने किसी कारण से कोट कचहरी मुकदमा आदि चीजों में लिप्त रहता है बिना कारणवश या यहां से उसे मुक्ति प्राप्त नहीं हो पाती है इन चीजों से दूसरा अपने मूल स्थान में हमेशा भय बना रहता है कहीं इसे छोड़ के ना जाना पड़े हमेशा चिंता ग्रस्त व्यक्ति रहता है तो ऐसी समस्याओं से मार्ग दिलाने वाला गोमेद रत्न ही है क्योंकि परेशानियां ही राहु ग्रह के कारण ऐसी उत्पन्न होती है

शत्रु बाधा से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है गोमेद रत्न

 चौथा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है इस समस्या का हल ढूंढते ढूंढते व्यक्ति के बाल सफेद हो जाते हैं कहा जाता है शत्रु बाधा निवारण अज्ञात शत्रु बाधा निवारण यदि जीवन में बनी हुई है हमेशा ही व्यक्ति जीवन में शत्रुओं से घिरा हुआ रहता है और भय रहता है कि कहीं शत्रु हमारा नुकसान ना करदे नुकसान ना पहुंचा दें ऐसी परिस्थितियों में जीवन के दिन कट रहे हो भय ग्रस्त होकर तो इन सभी कष्टों से मुक्तिदाता माना गया है राहु ग्रह का रत्न गोमेद क्योंकि ऐसी परिस्थितियां ही राहु ग्रह के कारण जीवन में उत्पन्न होती है तो बिना देर किए अवश्य ही मुक्ति हेतु गोमेद रत्न धारण अवश्य करना चाहिए

अनिद्रा दूर कर सकून की निद्रा देने वाला रत्न है गोमेद

पांचवा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है यदि जीवन में हमारे अनिद्रा है हम नीत पूर्ण रूप से नहीं ले पाते हैं इसके अतिरिक्त भय ग्रस्त रहते हैं या ऐसा महसूस होता है कि किसी ने हमारे ऊपर कोई जादू टोना आदि ना कर दिया हो और नकारात्मक ख्याल हमारे ह्रदय में ज्यादा आते हैं कल्पनाओं में अक्सर रहते हुए हो इसके अलावा स्वप्न भी हमें भयभीत करने वाले आते हुए हो रात्रि में नींद में चलने की आदत हो ऐसी परिस्थितियों में भी गोमेद रत्न आंख मूंदकर धारण कर लेना चाहिए क्योंकि इन परिस्थितियों के कारण कारक दाता ही राहु ग्रह है तो ऐसी परिस्थितियों से मुक्ति सिर्फ और सिर्फ उनके रक्त गोमेद से ही प्राप्त की जा सकती है और भी ऐसे बहुत से लक्षण बताए गए हैं परिस्थितियां बताई गई हैं जिन्हें देखते हुए हमें आंख मूंदकर गोमेद रत्न धारण कर लेना चाहिए जो कि चमत्कारी लाभदाई फलदाई हमारे लिए होता है तो यह जानकारी यदि आप लोगों को पसंद आए तो जरूर से आगे बढ़ा कर आप शेयर कर सकते हैं धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु मुझे क्लिक करें और देखें वीडियो

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