ज्योतिष शास्त्र 9 ग्रहों के इर्द-गिर्द घूमता हुआ शास्त्र है इसका मूल उद्देश्य 9 ग्रहों का मनुष्य जीवन में पड़ने वाला अनूकूल प्रतिकूल प्रभाव बताना ही है जिससे कि मनुष्य जीवन आसान सुलभ एवं सुन्दर तरीके से यापन हो सके। 9 ग्रह अपने आप में विशेष स्थान रखते हैं हर किसी ग्रह का फल भी अपने आप में अलग व विशेष होता है शुभ ग्रह जहां आसानी से मनुष्य को शुभ फल प्रदान करते हैं वहीं अशुभ ग्रह कठोर रुप से मनुष्य को अशुभ कष्टदाई फल भी प्रदान करते हैं विशेष रूप से अशुभ ग्रहों के प्रभाव से बचने के लिए मनुष्य निरंतर प्रयास करते रहता है कुछ अशुभ ग्रह तो आसानी से मान जाते हैं और शुभ फलदाई बन जाते हैं किन्तु कुछ अशुभ ग्रह कठोर साधना से भी मानने को तैयार नहीं होते हैं

आसानी से नहीं मानते हैं राहु केतु ग्रह
आज हम आपको 2 ऐसे ही अशुभ माने जाने वाले ग्रहों के बारे में बताएंगे जो कि बहुत मुश्किल से वश में आते हैं और 1 बार वशीभूत हो गए तो मनुष्य की नैया भी पार लगा देते है जो कि अन्य 7 ग्रह नहीं लगा सकते हैं यदि सातों भी 1 साथ मिल जाए। इन 2 ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु ज्योतिष शास्त्र में बताए गए 1 परम सिद्ध उपाय को आज हम आप लोगों को बताएंगे जिससे आप हमेशा के लिए इनकी पीड़ा से मुक्ति प्राप्त कर लेंगे और आजीवन इनका शुभ फल प्राप्त करेंगें ये ग्रह कोई और नहीं भगवान भोलेनाथ के गण राहु व केतु ग्रह है यह दोनों ग्रह भगवान भोलेनाथ के ऋणी भी माने जाते हैं भोलेनाथ इनके आराध्य हैं


सबसे प्रिय है यह भगवान भोलेनाथ के
और यह भी भोलेनाथ के प्रिय है समुद्र मंथन में अमृत पान के बाद जब भगवान श्री हरि विष्णु जी का सुदर्शन चक्र इनके पीछे पड़ा हुआ था तब भगवान भोलेनाथ ने ही इन्हें शरण दी थी एवं अपनी छत्र छाया में इन्हें रखा। तब से माना जाता है कि यह कभी भी भगवान भोलेनाथ के भक्तों को एवं उनसे संबंधित चीजों को अपने पास रखने वाले मनुष्यों को कभी भी कष्ट नहीं देते है एवं उनकी रक्षा स्वयं करते हैं तो आज हम आपको वह उपाय बता रहे हैं जिससे आप इन्हें अपना बनाकर अपने इस जीवन को साकार कर सकते हैं एवं इनका चमत्कारी फल इसी जीवन में देख सकते हैं वैसे तो ज्योतिष शास्त्र में इन्हें प्रसन्न करने हेतु अनेकों उपाय बताए गए हैं किन्तु यह उपाय विशेष स्थान रखता है

शीघ्र फलदाई माना जाता है यह उपाय
बताया जाता है कि इन्हें प्रसन्न करने हेतु भगवान भोलेनाथ के प्रिय वृक्ष बेल वृक्ष के पौधे पेड़ पर श्रावण मास में या नियमित तौर पर या फिर सोमवार, शुक्रवार, शनिवार को जल चढ़ाना चाहिए और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप इस वृक्ष के सम्मुख करना चाहिए साथ ही राहु केतु ग्रह का जाप व ध्यान भी करना चाहिए इससे यह व्यक्ति के अनूकूल होकर उसके कष्टों का शमन कर देते है एवं मनवांछित फल भी ऐसे जातक को प्रदान करते हैं यह एक परम सिद्ध उपाय है जो करता है वह इसके परिणाम से अचंभित रह जाता है हम उम्मीद करते हैं कि आप इससे अवश्य ही लाभान्वित होंगे और स्वयं को धन्य करेंगे। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो के माध्यम से देखने हेतु यहां क्लिक करें धन्यवाद

