ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का बहुत बड़ा महत्व है यह 1 बहुत बड़ा माध्यम है ज्योतिष ग्रह जनित समस्याओं को हल करने हेतु।84 प्रकार के रत्न रत्न शास्त्र में बताए गए हैं जिनमें 9 रत्न क्रम से माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा,नीलम, गोमेद, लहसुनियां एवं 75 उपरत्न जिनमें मुख्यतया सबसे प्रभावशाली रत्न समान या उससे भी श्रेष्ठ फलदाई उपरत्न
मुख्य फलदाई उपरत्न है यह

फिरोजा, सफेद मूंगा, सुनेहला, नीली, हरा ओनेक्स, मोजोनाइट,ओपल,काला हकीक, सुलेमानी हकीक, टाइगर स्टोन, गार्नेट, नीला लाजवर्त, और भी कई ऐसे उपरत्न है जो यदि सूट कर गए तो वारे न्यारे कर देते हैं इसका सही पता हमें कौन सा रत्न या उपरत्न पहनना चाहिए कुण्डली ही हमें 100% सत्य बता सकती है आज हम आप लोगों को फिरोजा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देंगे।

फिरोजा है सबसे बड़ा फलदाई उपरत्न

फिरोजा 1 चमत्कारी रत्न है जब कोई रत्न फल नहीं दे रहा हो तो उस परिस्थिति में एक मात्र मनुष्य को लाभ पहुंचाने वाला एवं उसकी मनोकामना को पूर्ण करने वाला रत्न है फिरोजा । फिरोज के बारे में पूर्व में भी हम बहुत महत्वपूर्ण जानकारी प्रसारित कर चुके हैं जिसे आप देखकर काफी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। फिरोज एकमात्र ऐसा रत्न है जिसे कोई भी धारण कर सकता है विशेष रूप से वृषभ, मिथुन, कन्या,तुला,मकर, कुंभ, मीन राशि वाले तो आंख बंद करके भी धारण कर सकते हैं किन्तु फिर भी ज्योतिष राय सर्वोपरि रहेगी। 12 रत्ती कैरेट से ऊपर का ही फिरोजा या कोई भी रत्न उपरत्न पहनना चाहिए।
फिरोजा सोने में धारण।

फिरोजा को चांदी में धारण करना चाहिए किन्तु यदि फिरोजा आपको सूट कर रहा है और आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह का गुरु ग्रह के साथ किसी न किसी प्रकार का सम्बन्ध बन रहा हो। राशि त्रिकोण सम्बन्ध भी बन रहा हो तो फिरोजा रत्न को आप तर्जनी अंगुली में सोने में जड़़वा कर और भी बढ़ा चमत्कारी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कमाल का रत्न है फिरोजा कुछ भी कर सकता है। अधिक जानकारी हेतु ब्लू लाइन शब्दों पर क्लिक करें धन्यवाद

