ज्योतिष शास्त्र में रत्न धारण करना किसी भी कार्य को सिद्ध करने व बड़ी बड़ी मुसीबतों से छुटकारा प्राप्त करने व अभीष्ट फल प्राप्त करने हेतु सरल आसान तुरंत फल देने वाला कलियुग में चमत्कारी 1 मात्र संसाधन है अक्सर ज्योतिष शास्त्र में विश्वास रखने वाले लोगों में यह अत्यधिक प्रचलित है एवं इनके पास किसी न किसी रूप में यह अवश्य ही रहता है
हर रत्न है अपने आप में बेमिसाल
9 प्रकार के रत्न एवं 75 प्रकार के उपरत्नों का प्रमाण रत्न शास्त्र में उपलब्ध है यह सभी 84 प्रकार के रत्न अत्यंत ही चमत्कारी व फलदाई माने गए हैं ग्रह से संबंधित समस्या हो या कोई अन्य समस्या तो सम्बंधित रत्न को धारण करवाया जाता है 1 विद्वान ज्योतिषी से विचार विमर्श परामर्श कर धारण किया गया रत्न जीवन में चमत्कार भी कर सकता है तो अवश्य ही रत्न धारण करते समय ध्यान दें कि रत्न आप को प्रभावित करने वाला समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाला व जीवन में नई चीजों का सृजन करने वाला हो तो ऐसा रत्न हीं धारण करना उचित माना जाता हैै एवं धारण करना चाहिए।

दिल है मजबूत तो दुनिया में है वजूद

आज हम आप लोगों को संक्षिप्त तौर पर बताएंगे चन्द्र ग्रह के रत्न मोती को धारण करने की अत्यंत सरल सिद्ध फल देने वाली विधि साथ में किन शारीरिक लक्षणों को एवं जन्म कुंडली में चंद्र ग्रह की किस स्थिति को देखते हुए मोती रत्न धारण करना चाहिए चन्द्रमा के बारे में कहा गया है कि चंद्रमा मनसो जात: अर्थात चंद्रमा मन के स्वामी है यदि किसी व्यक्ति का मन अस्थिर है एक जगह पर नहीं लगता है अत्यधिक चंचलता व्यक्ति पर रहती है तो ऐसी स्थिति में मोती रत्न को धारण कर लेना चाहिए इसके अतिरिक्त रोता संबंधित रोग व्यापार में नुकसान हो रहा हो माता के साथ संबंध अच्छे ना हो घबराहट बनी रहती हो और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो ऐसी स्थिति में भी मोती रत्न को धारण कर लेना चाहिए।
चंद्र ग्रह मजबूत है तो उच्च पद प्राप्ति अवश्य ही होगी
इसके अतिरिक्त यदि जन्मपत्रिका मैं चंद्र ग्रह स्थिति कमजोर हो तो भी मोती रत्न धारण कर लेना चाहिए जन्म कुंडली में जब चंद्र ग्रह लग्नेश हो प्रथम भाव के स्वामी, पंचमेश हो पंचम भाव के स्वामी, भाग्येश हो नवम भाव के स्वामी इसके अतिरिक्त जब चंद्र ग्रहण राशि के स्वामी तो मोती रत्न धारण कर लेना चाहिए किंतु ऐसी स्थिति होने पर यदि चंद्र ग्रह 6, 8, 12 भाव में बैठे हो तो मोती रत्न नहीं धारण करना चाहिए इसके अतिरिक्त नीचस्थ वृश्चिक राशि में हो तो भी धारण नहीं करना चाहिए किसी विद्वान ज्योतिषी से राय मशविरा कर ही धारण करना चाहिए
चंद्र ग्रह के लाभेश व भाग्येश होने पर भी मोती रत्न बन जाता है

इसके अतिरिक्त यह भी बताया गया है कि जब चंद्र ग्रह लाभेश हो एकादश भाव के स्वामी और भाग्य भाव में बैठ जाएं तो ऐसी स्थिति में वह उच्च के होते हैं तो मोती रत्न अवश्य ही धारण करना चाहिए और यदि जब चंद्र ग्रह भाग्येश हो नवम भाव के स्वामी तो सप्तम भाव में वह उच्च के होंगे तो ऐसी स्थिति में यदि व्यक्ति व्यापारी हो तो मोती रत्न अवश्य धारण करना चाहिए और यदि ऐसी ही स्थिति में पत्नी के साथ संबंध अच्छे नहीं बन पा रहे हो तो भी मोती रत्न को धारण अवश्य करना चाहिए। मोती रत्न को चांदी ने जड़वाया जाता है और दाहिने हाथ की कनिष्ठका अंगुली में इसे धारण किया जाता है इसके अतिरिक्त मोती रत्न को गजकेसरी योग होने पर गुरु की उंगली तर्जनी में भी धारण किया जाता है जो कि अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है मोती रत्न को पूर्णमासी के दिन धारण करने के लिए कहा जाता है इस दिन पूर्ण चंद्रमा के दर्शन करते हुए ही मोती रत्न को धारण करना चाहिए
पूर्ण चांद के दर्शन करते हुए मोती धारण करना पूर्ण फलदाई माना जाता है

बताया गया है कि जब भी आप मोती रत्न को बनाकर अपने पास घर पे लेकर आते हैं तो इसे गाय के शुद्ध दूध में डुबोकर रख देना चाहिए अपने मंदिर में और इसके ऊपर एक सफेद फूल रख देना चाहिए वहां पर को धूप अगरबत्ती काफी मात्रा में जला देनी चाहिए जिससे की धुआं ज्यादा मात्रा में हो खुशबू ज्यादा दूर तक तेजी के साथ फैले। नियमित सुबह शाम पूर्णमासी तक पूर्णमासी आने तक इसी तरह पूजा-पाठ करते रहे यहां पर को प्रतिदिन ओम नमः शिवाय की एक माला या शिव स्तुति अवश्य ही करनी चाहिए पूर्णमासी के दिन रात्रि को पूर्ण चांद के दर्शन करते हुए मोती रत्न को धारण करना चाहिए और जिस दूध में डूबोयागया था उसे नजदीक के किसी खिरनी रबर प्लांट आदि के पौधे के समीप छोड़ देना चाहिए या नजदीक में बहता हुआ जल हो शुद्ध उसमें भी आप इसे छोड़ सकते हैं मोती रत्न का रिजल्ट 24 दिन के भीतर ही देखने में आ जाता है और यह विधि अत्यंत ही आसान सरल सिद्ध मानी गई है तो यह चंद्र ग्रह व उनके रत्न मोती से संबंधित जानकारी यदि आप लोगों को पसंद आए तो जरूर इसे आगे बढ़ाकर आप शेयर कर सकते हैं अधिक जानकारी आप क्लिक करके भी प्राप्त कर सकते हैं धन्यवाद

