4 स्थान पर नियमित जो लगाते है यह तिलक तो राहु ग्रह बदल देते हैं उसकी तकदीर

ज्योतिष शास्त्र 1 ऐसा शास्त्र है जिस दिव्य शास्त्र की सहायता से बड़े-बड़े कष्ट परेशानियां मनुष्य अपनी दूर कर सकता है।और बहुत सी अपनी ऐसी कामना जो कभी भी पूरी होती नजर नहीं आती है उन्हें भी वह आसानी से पूरी कर सकता है ऐसा कोई ज्योतिषी नहीं कहता है कहता है अद्भुत अविश्वसनीय अलौकिक दिव्य ज्योतिष शास्त्र। आज हम आपको बताएंगे ज्योतिष शास्त्र की ऐसी जानकारी जो आपके जीवन को हर्षोल्लास से भर देगी।

राहु ग्रह यदि प्रसन्न है बिन मांगे मिलता है सब कुछ

ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह की पीड़ा को अत्यंत भंयकर एवं जीवन को तहस नहस करने वाली मान जाता है राहु ग्रह के नाम से ही बहुत से लोग जो इनके स्वभाव से परिचित नहीं हैं भयग्रस्त हो जाते हैं सही जानकारी के अभाव में किन्तु ऐसा नहीं है राहु ग्रह वह ग्रह है जो व्यक्ति को बिना मांगे ही बहुत कुछ हम तो यह कहेंगे कि सब कुछ दे देते हैं बस राहु ग्रह को जानने मात्र की देर है। हमारे ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को प्रसन्न करने हेतु ढेर सारे सरल सिद्ध आसान तुरंत फलदाई उपाय बताए गए हैं 1 ऐसा ही शीघ्र फलदाई उपाय आज हम आप लोगों के बीच लेकर आए हैं

पितृदोष हो या कालसर्प दोष हमेशा के लिए होता है दूर

शास्त्र कथन है नियमित इस उपाय को करने से हमेशा के लिए जहां राहु ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है वहीं राहु ग्रह प्रसन्न होकर जातक पर अपनी चमत्कारी कृपा रखना शुरू कर देते है। जिस तरह से हर एक ग्रह की अपनी जड़ी है तो राहु ग्रह की जड़ी चन्दन के पेड़ की जड़ बताई गई है चन्दन वह वृक्ष है जिसमें सांप लिपटे रहते है सांपों का प्रिय स्थान इसे ही माना जाता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु ग्रह व केतु ग्रह को सर्प रूपी ग्रह माना गया है जन्म कुंडली के 1 भयंकर त्राहि त्राहि मचा देने वाले दोष कालसर्प दोष के जनक भी यही 2 ग्रह माने जाते हैं।

सफेद चंदन का तिलक है अचूक रामबाण उपाय

तो बताया गया है कि जब कहीं से किसी भी तरह से राहु ग्रह की पीड़ा से व्यक्ति को लाभ नहीं हो पा रहा है तब व्यक्ति द्वारा नियमित सफेद चंदन की लकड़ी को रगड़कर घिसकर इसका लेप, तिलक बनाकर प्रतिदिन नियमित रूप से 4 स्थानों पर लगाया जाए तो कैसी ही अति भयंकर पीड़ा क्यों ना हो राहु ग्रह की हमेशा के लिए दूर हो जाती है 4 स्थानों में से सर्वप्रथम माथे में उसके पश्चात कंठ के ऊपर ठुडी के नीचे फिर दाहिने कान में आगे से और अन्त में बाएं कान के आगे से लगाना चाहिए। तिलक के इस्तेमाल में हमेशा मध्यमा बीच वाली अंगुली का ही इस्तेमाल करना चाहिए और तिलक लगाते समय देवाधिदेव महादेव भगवान भोलेनाथ का ध्यान स्मरण अवश्य करना चाहिए।यह 1 ऐसा उपाय है जो इसे करता है राहु ग्रह ही नहीं अपितु सभी ग्रहों की पीड़ा के साथ साथ भूत प्रेत बाधा दैवीय बाधा काला जादू के साथ असाध्य रोग व हर प्रकार की बाधा परेशानियों से हमेशा के लिए मुक्ति प्राप्त करता है जानकारी यदि पसंद आए तो सर्वप्रथम इसे स्वयं में इस्तेमाल अवश्य करें धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें

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