जीवन में उन्नति करना हर व्यक्ति का सपना होता है लेकिन इन 3 स्थानों पर ग्रह नहीं तो क्या सपना अधूरा

ज्योतिष शास्त्र 1 ऐसा शास्त्र है जिसमें हर समस्या का समाधान छिपा हुआ है समस्या कैसी ही गंभीर क्यों नहीं हो। मनुष्य जिज्ञासु प्रवृत्ति का है उसकी जिज्ञासा ज्योतिष शास्त्र में है तो संकट उसे कभी घेर नहीं सकते हर संकट को पछाड़ता ऐसा व्यक्ति जीवन चक्र में सदा उन्नति के साथ आगे बढ़ता रहता है।

उन्नति मनुष्य का उद्देश्य नहीं सपना होता है

मनुष्य योनि में यदि जन्म लिया है तो क्षण क्षण जीवन उन्नति की सीढ़ी चढ़ते हुए आगे बढ़ते चलता है। हर क्षेत्र में उन्नति करना 1 व्यक्ति का सपना उद्देश्य होता है। और इसके बिना जीवन का असली आनंद अन्य नहीं।

कुंडली दिखाती है उन्नति पथ

जन्म कुंडली को 1 व्यक्ति के जीवन में की जाने वाली उन्नति का आइना कहा जाता है जन्म कुंडली से हम जान सकते हैं कि जीवन पथ पर हम कितनी उन्नति कर सकते हैं इसके 3 भाव सामान्य तौर पर बता देते हैं यदि इन तीन भाव में कोई भी ग्रह नहीं है और इन तीनों भावों के स्वामी भी कमजोर हैं तो जीवन नीरस रहेगा जीवन में उन्नति का अभाव रहेगा जो भी कार्य करेंगे वह व्यर्थ चला जाएगा।

शत्रु का होना जरूरी है अपनी उन्नति के लिए

पहला भाव है छठा भाव इस भाव में कोई ग्रह नहीं हो तो उन्नति के पथ पर रूकावट का यह 1 कारण हो सकता है क्योंकि छठा भाव रोग भाव,शत्रु भाव एवं गुप्त भाव होता है यदि जीवन में कोई शत्रु नहीं रहेगा तो व्यक्ति को किसी भी प्रकार का भय डर आदि नहीं रहेगा। किन्तु इस कारण व्यक्ति कुछ नया ग्रहण भी नहीं कर पाएगा। यदि शत्रु होगा तो व्यक्ति परेशान रहेगा उससे मुक्ति हेतु उसे दबाने गिराने हेतु वह नया प्रयास करेगा बुद्धि पर बल पड़ेगा और अन्त में सभी प्रयासों के उपरान्त शत्रु शमन कर जीवन में कुछ नया अर्जन करेगा सीखेगा जो जीवन की उन्नति में 1 महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

जोखिम नहीं लेना उन्नति मार्ग में सबसे बड़ी बाधा

दूसरा भाव अष्टम भाव है इस भाव में भी ग्रह नहीं होना उन्नति पथ पर रुकावट कारी रहता है
जोखिम जिसके बिना बड़ी कामयाबी नहीं मिलती अष्टम भाव इसका प्रतिनिधित्व करता है यदि अष्टम में कोई ग्रह नहीं हो तो व्यक्ति जोखिम लेने से डरने वाला होता है छोटे-छोटे कार्यो के लिए भी उसे दूसरे से मदद लेनी पड़ती है ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति उन्नति नहीं कर सकता है जब उसके अन्दर अपने कार्यो को करने की क्षमता का अभाव हो तो उन्नति की उम्मीद करना ऐसे व्यक्ति से बेइमानी ही होगी।

कष्ट मिलेगा तो बुद्धि चलेगी और उन्नति पथ होगा मजबूत

तीसरा भाव बताया गया है द्वादश भाव। कष्ट का भाव हानि का भाव यदि व्यक्ति के जीवन में कष्ट नहीं होंगे और व्यक्ति के जीवन में हानि नहीं होगी तो उसे कभी लाभ का पता नहीं चलेगा बिना कष्टों के व्यक्ति मजबूत नहीं बनता रेत के महल की भांति रहता है कि कभी भी हवा के झोंके से वह गिर सकता है कष्ट प्राप्ति के पश्चात मुक्ति का मार्ग निकालकर ही व्यक्ति मजबूत बनता हैऔर जीवन की उन्नति के पथ पर एक कदम मजबूती के साथ आगे बढ़ाता है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है यह कहावत गलत नहीं है यदि व्यक्ति अपने जीवन में कुछ खोएगा ही नहीं हानि नुकसान का उसे पता ही नहीं चलेगा तो वह लाभ फायदे के बारे में सोचेगा जानेगा कैसे यदि हानि होगी तो लाभ के मार्ग के बारे में वह सोचेगा विचारे का बुद्धि पर जोर डालेगा अवश्य ही मार्ग निकाल लेगा जो की उन्नति पथ पर उसका एक कदम और मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

ऐसी स्थिति में कुंडली के बारे में अवश्य जानना चाहिए

इन 3 भावों में कोई ग्रह स्थित नहीं हो व इनके भावेश भी कमजोर हो तो उन्नति बाधक योग बनता है किन्तु जन्म कुंडली में अन्य परिस्थितियों से भी अवगत हो अन्त में 1 निर्णय पर पहुंचने के पश्चात ही फल जानना चाहिए। यदि आज प्रसारित यह जानकारी आप लोगों को पसंद आए तो जरूर इसे आगे बढ़ाकर आप शेयर करिए धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु मुझे क्लिक करें

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