नमस्कार स्वागत है आप सभी लोगों का गायत्री ज्योतिष केंद्र में हमेशा ही आप लोगों के लिए ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी के एपिसोड हम समय- समय में पर प्रसारित करते रहते हैं आज भी हम आप लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं.
आज हम आपको बताएंगे कि वो कौन से लोग होते हैं की जिसका जन्म कुंडली के अनुसार विवाह योग और प्रेम विवाह योग बनता है उसी के बारे में आज आपको कुछ तथ्य बताऊंगा तो जानकारी शुरू करते हैं द्वय विवाह योग और प्रेम विवाह योग के बारे में सबसे पहले बात करते हैं द्वय विवाह योग की की शास्त्र में यह भी बोला गया है द्वय विवाह योग का अर्थ यह भी होता है की पति-पत्नी एक- दूसरे के अलावा यदि किसी और के साथ कोई संबंध रखते हैं तो वह भी द्वय विवाह योग की श्रेणी में ही आता है तो बात करते हैं पहला योग कैसे बनता है सप्तम भाव जो कि पति की कुंडली में पत्नी का अभाव पत्नी की कुंडली में पति का भाव होता है और अष्टम भाव जिसे मृत्यु भाव कहा गया है क्योंकि यह दोनों भाव मारक होते हैं और जीवन में हम किसी की मृत्यु जो आकलन करते हैं.वह अक्सर अष्टम भाव की स्थिति को देखते हुए ही करते हैं यदि सप्तम भाव का स्वामी अष्टम में बैठ जाए और अष्टम का स्वामी सप्तम में बैठ जाए तो यह पहला द्वय विवाह योग कारक माना गया है दूसरा द्वादश भाव जो व्यय का भाव होता है हानि का भाव होता है नुकसान का भाव होता है यदि सप्तम भाव का स्वामी द्वादश में बैठ जाए और द्वादश का स्वामी सप्तम में बैठ जाए तो यह दूसरा द्वय विवाह योग यानी दो विवाह योग का दूसरा कारण होता है यानी कि दूसरा योग माना जाता है तीसरा योग सबसे प्रबल योग माना जाता है जिसे स्वयं ब्रह्मादेव भी नहीं टाल सकते है सप्तम का स्वामी अष्टम में अष्टम का स्वामी द्वादश में या इन तीनों का आपस में सप्तम, अष्टम, द्वादश का स्थान परिवर्तन योग यदि बन जाता है तो यह प्रबल द्वय विवाह कारक योग माना जाता है.
अब बात करते हैं प्रेम विवाह योग की प्रेम विवाह यानी की प्रेम का जो कारक होता है वह मंगल ग्रह होता है और जो प्रेम का भाव होता है वह पंचम भाव माना गया है क्योंकि विद्या, बुद्धि प्रेम का जो हम विचार करते हैं लोगों को जो हम बताते हैं इसी भाव से हम बताते हैं तो यदि पंचम भाव में उच्च का मंगल यानी मकर का मंगल बैठ जाए तो संभावना पूरी रहती है की ऐसी जातक का प्रेम विवाह होगा या मंगल सग्रही हो जाए मेष या वृश्चिक का बली होकर तो भी पूरी की पूरी संभावना रहती है कि ऐसे जातक का प्रेम विवाह होगा ही होगा अब बात करते हैं योगों की सप्तम पंचम भाव प्रेम का भाव सप्तम भाव पति पत्नी का भाव यदि पंचम का स्वामी सप्तम में बैठ जाए और सप्तम का स्वामी पंचम में बैठ जाए यह दूसरा ऐसा योग होता है.
प्रबल योग होता है की ऐसी जातक का प्रेम विवाह होगा ही होगा तीसरा योग जिसे स्वयं ब्रह्मादेव भी नहीं टाल सकते व्यय भाव द्वादश भाव को लोगों ने यह भी कहा गया है कि इस बिस्तर का भाव भी माना गया है पंचम भाव का स्वामी सप्तम में सप्तम का द्वादश में या द्वादश का स्वामी पंचम में तीनों का आपस में स्थान परिवर्तन योग यदि बन जाता है तो यह प्रबल प्रेम विवाह माना जाता है और शास्त्र में यह भी कहा गया है कि ऐसे जो जातक होते हैं वह शादी से पूर्व ही साथ रहना शुरू कर देते हैं संबंध बनाना शुरू कर देते हैं ऐसा शास्त्र कहते हैं शास्त्र में यह सूत्र बताए गए हैं कि यदि किसी की कुंडली से हमें पता लगाना हो तो हम कैसे पता लगाएंगे.
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