Surya Rahu Yuti : सूर्य -राहु की युति 4 भावों में मनुष्य को झकझोर के रख देती है

Surya Rahu Yuti : सूर्य -राहु की युति 4 भावों में मनुष्य को झकझोर के रख देती है

नमस्कार गायत्री ज्योतिष केंद्र में आप सभी लोगों का स्वागत है आप लोगों के लिए हमेशा ही ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी के एपिसोड हम समय-समय पर प्रसारित करते रहते हैं ज्योतिष से जुड़ी हुई हर प्रकार की जानकारी हम आप लोगों के लिए लेकर आते हैं जानकारी ऐसे कि जिस पर यदि आप अमल करते हैं तो उसका प्रतिफल आप अवश्य ही देखते हैं

आज भी हम आप लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं जानकारी है राहु-सूर्य की यूति (Surya Rahu Yuti) यानी कि ग्रहण दोष से संबंधित ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि कर भाव जो की विशेष भाव बताए गए हैं वहां पर को अगर यह युति बन जाती है तो व्यक्ति को यह बहुत ज्यादा पीड़ित करती है एक प्रकार से उनके पूरे जीवन भर ही ग्रहण बना रहता है अगर वह कोई उपाय आदि नहीं करता है कहीं पर तो राहु का उपाय होता है और कहीं पर को सूर्य का उपाय भी होता है तो उपाय आदि तो हम आपको बता भी देंगे साथ-साथ ही किंतु अगर इंचार्ज स्थान पर आपके किसी के भी यह ग्रहण दोष बना है राहु सूर्य का तो अवश्य ही उपाय करिए और ग्रहण दोष को हटाइए वरना जीवन भर ग्रहण लगे रहेगा

कोई भी कार्य पूर्ण तरीके से संपन्न नहीं होगा और कोई भी चीज आपके जीवन में जिस चीज की भी आप इच्छा करेंगे चाहते हुए भी आपको नहीं मिल पाएगी भले ही वह छोटी चीज हो या बड़ी चीज हो हर जगह पर ग्रहण लगा देता है.

Surya Rahu Yuti

पारिवारिक तौर पर सामाजिक तौर पर आर्थिक तौर पर शारीरिक तौर पर तो इसलिए ऐसे ग्रहण दोष से हमेशा बचना चाहिए और उपाय करने अवश्य चाहिए विशेष तौर पर दोनों के लिए उपाय कर सकते हैं राहु के लिए भी सूर्य के लिए भी तो जानते हैं वह चार भाव कौन से हैं तो ज्योति शास्त्र में बताया गया है पहला भाव तीसरा भाव मैं यदि राहु और सूर्य की युति (Surya Rahu Yuti) बन जाती है ग्रहण दोष बन जाता है तो इसे बहुत ही खराब माना जाता है माना जाता है कि ऐसे जातक का हमेशा अपने भाइयों के साथ विवाद रहता है किसी न किसी प्रकार से वह भाइयों से अपने निकटतम संबंधियों से पीड़ित रहता है दूसरा ऐसा व्यक्ति डरपोक किस्म का होता है बिल्कुल हिम्मत का अभाव होता है ऐसे व्यक्ति में थोड़े में घबरा जाता है तो ऐसी और दूसरा इसका सबसे बड़ा है कि भाग्य भाव में केतु होता है भाग्य भाव में पूर्ण दृष्टि रहती है

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राहु की और यहां पर केतु बैठ जाता है खुदान खुदस्ता केतु का उपाय नहीं किया गया है और ग्रहण दोष है तो समझ लीजिए कि ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी भी कोई भी काम नहीं बनेंगे बचपन से लेकर पूरे बुढ़ापे तक पहले तो विद्या आदि में रुकावट रहेगी जवानी में नौकरी के लिए तरसेगा व्यक्ति नौकरी मिलेगी छूटेगी मिलेगी छोटे की कोई यह सम्मान आदि नहीं मिलेगा मनमाफिक नौकरी नहीं मिलेगी जिस प्रकार की व्यक्ति के अंदर एबिलिटी होती है.

Surya Rahu Yuti

योग्यता होती है तो उसे हिसाब से उसकी कोई भी आगे को जो जब जो चाहेगा नहीं मिल पाएगी धन की हमेशा कमी रहेगी और अन्य जगहों पर पारिवारिक सुख सामाजिक सुख आर्थिक सुख शारीरिक सुख भी व्यक्ति को नहीं मिलेगा कहीं ना कहीं इसे भी जातक पीड़ित रहता है कारण दोष में यानी कि ग्रहण लग जाता है

खाने का अर्थ है कि भाई यार हमने यह काम शुरू किया मकान बनाना शुरू किया पैसा भी हुआ सब कुछ हुआ लेकिन मकान बन नहीं पाया पैसे हैं सब कुछ है हम कोई वाहन लेना चाह रहे हैं लेकिन नहीं ले पाएंगे वह पैसा हमारा कहीं दूसरी जगह चल जाएगा या किसी न किसी रूम में इधर-उधर इन्वेस्ट हो जाएगा तो ऐसे ग्रहण दोष में हमेशा बचना चाहिए

यहां पर के लिए तो सबसे पहले क्योंकि भाग्य में केतु होता है भाग्य को साफ करना चाहिए कम से कम भाग्य तो साथ दे तो केतु का रत्न लहसुनिया के तो ग्रह जनित उपाय भी करनी चाहिए दूसरा नित्य सूर्य उपासना कहीं पर को भेजो चारों भाव में भी अगर ग्रहण दोष है तो सूर्यउपासना हां सूर्य उदय से आधे घंटे पहले क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त में माना जाता है वैसे सूर्य को जल देना जब दिशाएं खुल जाती है.

Surya Rahu Yuti 2025

तो उसके बाद आप कभी भी सूर्य को जल दे सकते हैं और ज्योतिष शास्त्र में विशेष जो सूर्य का अगर फल प्राप्त करना है तो सूर्य उदय से पहले करीब आधे घंटे पहले क्योंकि सूर्य भगवान कभी अस्त नहीं होते हैं हमारे यहां नहीं है तो अमेरिका कनाडा आदि में है तो इसलिए सूर्य भगवान को अवश्य ही जल देना चाहिए और राहु ग्रह जनित उपाय अवश्य कर लेने चाहिए दूसरा भाव बताया गया है सप्तम भाव में यदि राहु सूर्य की युति बन जाती है

तो यह भी बहुत खराब मानी जाती है ऐसी युति पहले तो दांपत्य जीवन को प्रभावित करती है पहले तो जातक का विवाह होता ही नहीं है बहुत मुश्किल से अगर हो भी गया तो वह दांपत्य जीवन उसके लिए कटुमय बन जाती है पीड़ित करने वाला बन जाता है आपस में बनेगी नहीं अति शीघ्र ही अलगाव वाला योग बन जाएगा यानी जिसे डिवोर्स योग तलाक योग कहते हैं

दूसरा अगर ऐसी व्यक्ति जहां पर यह राहु और सूर्य रहेंगे लग्न में केतु रहेगा तो अक्सर देखा जाता है कि 80% के आसपास लोग व्यापारी होते हैं बिजनेस से कहीं ना कहीं वह बिजनेस में इंवॉल्व होते हैं किसी भी प्रकार के बिजनेस में अगर जॉब भी कर रहे हैं तो भी कोई ना कोई उसका बिज़नेस अवश्य रहता है किंतु वहां पर को डुबने की पूरी की पूरी संभावना रहती है.

Surya Rahu Yuti 2024

क्योंकि यहां पर को ग्रहण दोष है सप्तम भाव व्यापार भाव भी कहा है स्त्री जाया भाव भी कहा गया है दूसरा मरक भाव भी कहा गया है ऐसा ग्रहण दोष कभी-कभी अकस्मात बड़ी घटनाएं हमारे साथ ऐसी ले आता है की जिससे कि हम आहट हो जाते हैं शारीरिक तौर पर बड़े कष्ट को भी हमें झेलना पड़ता है तो लग्न में केतु होता है यहां पर अगर यहां रह हो रहेगा तो यहां के तो रहेगा तो यहां पर को भी घर परिवार को भी प्रभावित करता है पारिवारिक सुख नहीं मिल पाता है और आती बहुत कम उम्र में ही परिवार से अलग रहना पड़ता है जातक को भले ही दूर चले जाएगा

कहीं दूर जॉब आदि करेगा या किसी न किसी प्रकार से परिवार से अलग रहेगा परिवार का सुख उसको नहीं मिल पाता है स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है ऐसा यह ग्रह दोष कहीं ना कहीं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी अवश्य ही होगी जिनका होगा चेक कर लीजिए किसी न किसी प्रकार की स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां और अक्षय कुमार बड़े कष्ट का आना बस सब कुछ ठीक चल रहा है अब तो कम से कम भगवान से हम प्रार्थना कर की अब सब ठीक-ठाक रहे हमारा तो जैसे ही ऐसा होगा तो कुछ दिनों बाद कोई ऐसी भयंकर पीड़ा आ जाएगी की फिर आदमी इंवॉल्व हो जाएगा कस्टमर तो इसलिए यहां पर के लिए भी लहसुनिया रत्न तो अवश्य धारण करना चाहिए.

Surya Rahu Yuti 2024

अगला भाव दशम भाव बताया गया है दशम भाव में सूर्य राहु की युति (Surya Rahu Yuti) हो तो माना जाता है कि ऐसी युति व्यक्ति को समझ में नीचे गिरा देती है समाज से कोई उसको मान सम्मान नहीं मिलता कोई यश नहीं मिलता और ना ही कोई पद में वृद्धि होती है अगर व्यक्ति कहीं पर कोई भी जॉब आदि भी कर रहा है बिजनेस भी कर रहा है बिजनेस भी होगा तो आगे को बढ़ेगा ही बढ़ेगा नहीं तो बस सीमित रहेगा कहीं ना कहीं व्यक्ति परेशान रहेगा

इसी तरीके से अगर नौकरी आदि होगी तो वहां पर कोई पद वृद्धि नहीं होगी ना उसको जिस लायक का वह कार्य करेगा कभी उसको यस नहीं मिलेगा उस उसके उस काम काम करने वाले नीचे वाले लोगों को यस मिलेगा लेकिन उसे यश प्राप्त नहीं होता है और दूसरा दशम भाव पिता का कारक भाव भी होता है और यहां पर सूर्य को पिताकारक माना जाता है तो पिता का सुख ऐसे जातक को बहुत कम ही मिल पाता है ना के बराबर चांस होते हैं कारण दोष लग जाता है पिता के साथ वैचारी के मतभेद रहेंगे विचार ही नहीं मिलेंगे और हो सकता है ऐसा जातक पिता से अलग ही रहे और कहीं-कहीं पर तो पिता सुख मिलता ही नहीं है जातक का ऐसा भी देखा जाता है.

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