(पार्ट -1) SaTik kundali Analysis – जाने उपाय कैसे करें गोमेद+फिरोजा+सफेद मूंगा Ase niklte hai भाग्य शाली रत्न
नमस्कार गायत्री ज्योतिष केंद्र में आप सभी लोगों का स्वागत है आप लोगों के लिए हमेशा ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी के एपिसोड हम समय-समय पर प्रसारित करते रहते हैं ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई हर प्रकार की जानकारी हम आप लोगों के लिए लेकर आते हैं जानकारी ऐसे ही जिस पर यदि आप अमल करते हैं तो उसका प्रतिफल आप अवश्य ही देखते हैं आज भी हम आप लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं महत्वपूर्ण जानकारी है
(SaTik kundali Analysis) कुंडली विश्लेषण से संबंधित सूर्य से हम बात करेंगे सूर्य ग्रहण जो की जन्म कुंडली के सस्ते हैं यानी कि छठे भाव के स्वामी है सप्तम भाव में बैठे हैं यानी की छठा भाव रोग भावकहा जाता है सप्तम भाव को जय भाव यानी की पत्नी का भाव कहा जाता है व्यापार भाव भी कहा जाता है और एक प्रकार से मानक भाव भी कहा जाता है तो यानी कि सूर्य सस्ते होकर सप्तम भाव में बैठे हैं तो थोड़ा सा कुछ है कमजोर माने जाएंगे एक माध्यम कमजोर बहुत ही कमजोर जो कि हमें हर समय पर कष्ट देगा लेकिन ऐसा नहीं यह ग्रह जो ऐसे होते हैं वह खराब फल देते हैं
जब उनकी कोई दशा अंतर्दशा में कालचक्र स्तोत्र में आए होती हैं वहां पर कोई जरूर अपने आप फल दिखाते हैं जहां पर को भ्रमण कर रहे होंगे गोचर में उसे भाव से भी संबंधित थोड़ा खराब फल देंगे और जहां पर को बैठे हैं उसे भाव से भी संबंधित है दूसरा सप्तम भाव में जन्म काल में बैठे हैं सप्तम भाव व्यापार भाव होता है पत्नी का भाव होता है और मानक भाव होता है एकदम से कष्ट प्राप्त हो जाता है यदि विवाह हो जाता है तो ऐसे में जातक को क्या कहते हैं अभी सामान्य स्थिति में सूर्य आधा कारक है पिता कारक है तो ऐसी स्थिति में कभी भी जातक का पिता के साथ कोई बहुत अच्छा घनिष्ठ संबंध नहीं बन पाता है

वैचारिक कुंडली में देखने में आया और पिता के साथ जातक के कोई संबंध नहीं है बालक पिता की बात को सुनता ही नहीं है क्योंकि स्टेज होकर सप्तम भाव में है उत्पन्न होना इसलिए सूर्य संबंधित उपाय अवश्य कर लेनी चाहिए ऐसी स्थिति में जो हमने इनको उपाय बताएं कि बालक को प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठाइए सूर्य को जल देने के लिए प्रमोट करिए और इसके साथ-साथ बात के द्वारा सूर्य संक्रांति का उपवास बहुत बड़ा कारगर उपाय माना जाता है ज्योतिष शास्त्र में ऐसी स्थिति हो और बच्चा हो और नहीं कर रहा हूं और विवाह नहीं हुआ हो विवाह के बाद स्त्री के द्वारा पत्नी के द्वारा किया जा सकता है लेकिन उससे पूर्व माता के द्वारा सूर्य संक्रांति का उपवास करना आवश्यक चाहिए यदि नियमित तौर पर कुछ वर्ष तक सूर्य संक्रांति का उपवास किया जाता है यदि व्यक्ति का व्यापक है या कोई जब भी है तो एक्स्ट्रा वर्क के माध्यम से चंद्रमा की जन्म कुंडली के स्वामी है.
चंद्रमा ग्रह –(Chandrama grah)जो जन्म कुंडली के भाग्येश है भाग्य के स्वामी है और द्वादश में बैठ भाग्येश द्वादश में बैठ है यानिकी भाग्येश का द्वादश में बैठना द्वादश भाव अंतिम भाव होता है इसका सीधा सा फल ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है यदि एगा तो व्यक्ति की घर से दूर उन्नति होती है वहां पर को भाग्य उदय होता है ऐसा जातक यदि अपने घर के नजदीक रहेगा तो कभी जीवन में पूर्ण लाभ नहीं होता इच्छाएं आकांक्षाएं पूर्ण नहीं हो पाती कुछ ना कुछ उसको जीवन में कमी होती रहती है जहां तक देखा जाता है ऐसे जातक को उन्नति देखने में नहीं आती जो ज्यादा घर के नजदीक पर रहेगा
मंगल ग्रह-(Mangal grah) जाति की कुंडली (SaTik kundali Analysis) में मंगल निश्चित बैठे हुए हैं और जन्म कुंडली के षष्ठेश है और लग्नेश है लग्नेश यानी घर का स्वामी शरीर का स्वामी घर के अंदर सुख शांति का स्वामी और दूसरा षष्ठेश यानिकी रोगेश शत्रुभावेश गुप्त तौर पर नैनीहाल से संबंध होता है दूसरा नीच राशि में बैठ जाए तो वह भी शनि के साथ उसको फल मिल जाता है क्योंकि दोनों आक्रामक प्रवृत्ति के ग्रह हैं तो ऐसी स्थिति में घर में अशांति घर को वहां भंग करने वाला माना जाता है किसी के साथ अच्छे संबंध नहीं रहते किसी के साथ विचारों का मिलन नहीं रहता है
उपाय-(Upay) उपाय यह है कि आप हनुमान जी की आराधना करें और आपको इसका चमत्कारी फल प्राप्त होगा आप मंगलवार का उपवास कर सकते हैं और प्रतिदिन पांच बार हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं
बुध ग्रह-(Budh grah)अगले ग्रह बुध ग्रह जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह अपने ही स्थान में बैठे हैं अष्टम भाव में अष्टमेश है लाभेश भी है लाभ भाव के स्वामी है उनके स्थान में केतु बैठे हैं क्योंकि तू का लाभ भाव में बैठना शुभ माना जाता है बुद्ध का अष्टम भाव में बैठना थोड़ा सा कुछ कमजोर होता है एक प्रकार से समुद्र योग भी होता है यदि आपकी कुंडली में नीचे स्थान में तीन ग्रह बैठे हुए हैं तो उसे समुद्र योग कहा जाता है यानी की व्यक्ति को समुद्री के स्थान से लाभ और दूसरा विदेश में लाभ अष्टम भाव में यदि बुड्ढे होंगे तो मां के चलें कोई ना कोई प्रॉब्लम हमें जरूर रहेगी बुद्धि स्थिर रहेगी सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाएंगे क्योंकि बुध ग्रह को बुद्धि का कारक माना जाता है और यदि हम व्यापार से संबंध रखेंगे बुद्धि की ऐसी स्थिति व्यापार पर भी रोक लगा देती है अष्टम भाव में बुध ग्रह का बैठना विशेष तौर पर पेशाब संबंधी रोग और लिक्विड संबंधी रोग और शरीर में जल की कमी हो जाना
बुध ग्रह का उपाय-(Budh grah ka Upay)दान कर लीजिए बुध ग्रह का जाप करिए इसके अलावा भगवान गणेश की आराधना भगवान गणेश की एक माला या तीन माला ओम गण गणपति नमः या ओम सिध्दीविनायक नमः या ओम श्री गणेशाय नमः यह तीन माला प्रतिदिन करिए भगवान गणेश की प्रतिदिन दूर्वा पान का पत्ता और तंबूर प्रतिदिन चढ़ाये.
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