नमस्कार गायत्री ज्योतिष केंद्र में आप सभी लोगों का स्वागत है आप लोगों के लिए हमेशा ही ज्योतिष शास्त्र से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी के एपिसोड हम समय-समय पर प्रसारित करते रहते हैं ज्योतिष से जुड़ी हुई हर प्रकार की जानकारी हम आप लोगों के लिए लेकर आते हैं जानकारी ऐसी की जिस पर यदि आप अमल करते हैं तो उसका प्रतिफल आप अवश्य ही देखते हैं आज भी हम आप लोगों के लिए राहु ग्रह से संबंधित एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं आज हम आप लोगों को बताएंगे कि उन चार स्थानों पर बैठे हुए राहु के लिए हम क्या कर सकते हैं जो की बार-बार हमें समय-समय पर कष्ट देते रहते हैं ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि कर ऐसे भाव होते हैं जहां पर को अगर राहु ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बैठ जाए तो वह समय-समय पर व्यक्ति को पीड़ित करते रहते हैं और उनके लिए उपाय अवश्य ही करना चाहिए और समय-समय पर करते रहना चाहिए जैसे ही उपाय छोटा वैसे ही राहु ग्रह का प्रकोप शुरू हो तो ज्यादा विलंब ना करते हुए हम यह जानते हैं कि कर भाव हैं कौन से हैं और इन चार भावों के बारे में ज्योतिष की कई पुस्तकों में कई ग्रहों में बताया गया है कि इन चार स्थानों पर बैठे हुए राहु का उपाय अवश्य ही कर लेना चाहिए और अक्सर हम जन्म पत्रिका देखते हैं और लोगों की पत्रिका में हम देखते हैं कि जिन-जिन लोगों के इन भाव में राहु बैठे रहते हैं वह बताते हैं कि समय-समय पर हमारे संग घटनाएं घटती रहती हैं और ऐसी घटनाएं कि हम उपाय भी नहीं करते तो कुछ समय तो शांति मिलती है जैसे ही उपाय छूटता है वैसे ही यह राहु ग्रह हमें फिर दोबारा से पीड़ित करते हैं और हम आपको इसके लिए अगले एपिसोड में उपाय भी बताएंगे कि इसके लिए हमेशा के लिए यानी परमानेंटली जो समाधान है वह क्या हो सकता है.
राहु ग्रह का इन भाव में बैठे हुए राहु के लिए तो पहले जानते हैं कि वह चार भाव कौन से हैं पहले बताया गया है दूसरे भाव यदि राहु ग्रह बैठ जाए तो यह मान के चलिए की व्यक्ति को यह समय-समय पर पीड़ित करते ही रहेंगे इसके पीछे का कारण की दूसरा भाव मारक भाव होता है और दूसरा भाव धन का भी भाव होता है परिवार का भी भाव होता है मित्र बांधों का भी भाव होता है तो ऐसे भाव में यदि राहु बैठेंगे तो समय-समय पर धन हानि करेंगे परिवार के साथ क्लेश करवाएंगे मित्रों के साथ अच्छे संबंध भी बने होंगे तो उन्हें भी कटुता में बदल देंगे तो कभी भी यदि दूसरे भाव में यदि राहु ग्रह बैठे हो तो इसका उपाय विशेष तौर पर एक बार जप तो इनका जो 18000 की संख्या में बताया गया है अवश्य ही कर लेना चाहिए इसके अलावा जो उनके अन्य उपाय दिए रहते हैं कई उपाय तुम्हारे चरणों में आपको मिलेंगे तो उन्हें समय-समय पर करते रहना चाहिए जो कि आपको सरल लगते हैं जिन्हें आप प्रतिदिन भी कर सकते हैं कुछ उपाय ऐसे हैं सरल होते हैं और रोज कियें जा सकते हैं कुछ उपाय ऐसे होते हैं कि जो महीना में किए जाते हैं तो अवश्य ही कर लेना चाहिए लेकिन इसकी सबसे बड़ी बात की डेढ़ साल यानी की 18 महीने के भीतर एक बार राहु ग्रह का जाप अवश्य ही कर लीजिए.एक बार पूर्ण जप करवा लीजिए 18000 की संख्या में उसके बाद दशा यानी किया 18000 की संख्या में अगले चरणों में अगले आने वाले डेढ़ साल 181 महीने मैं इस तरीके से करते रहिए तो यह ग्रह शांत हो जाएंगे फिर यह कभी आपको पीड़ा नहीं देंगे और यदि आप यह समझते हैं कि हमने एक बार यहां पर को जप करवा लिया उपाय कर लिया फिर हमें राहु ग्रह परेशान नहीं करेंगे तो ऐसा नहीं है यह एक ऐसे ग्रह है जो की बार-बार देखते रहते हैं व्यक्ति को जैसे ही जैसे कहते हैं की नजरे हटी दुर्घटना घटी वैसे ही व्यक्ति का वहां पर से ध्यान हटा वह दोबारा से उसको पीड़ित करते हैं और पीड़ा का यह रहता है कि जो पहली बार की पीड़ा से अगली बार दुगनी पीड़ा मिलेगी उसके बाद और बढ़ती जाएगी पीड़ा कम नहीं होगी जैसे एक बार अपने शांति कर ली यहां पर को भाई हमने बढ़िया तरीके से चलो हो गया अब तो हम निश्चित हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है यह मान के चलिए की एक बार अगर काम पीढ़ा मिलती है तो अगली बार बढ़ेगी वह काम नहीं होगी तो इसलिए एक दूसरे भाव में बैठे हो या जो हम आगे को भी आपको भाव बताएंगे तो वहां पर को भी उपाय इसी तरीके से चलते रहेगा और अगले एपिसोड में हम आपको राहु ग्रह का एक बहुत अच्छा उपाय बताएंगे उसे चीज को आप अपने घर में रखिए तो राहु ग्रह फिर कभी आपको इन उपायों के साथ अगर यदि आप कर रहे हैं और वह चीज आपके घर में है तो फिर कभी आपको पीड़ा नहीं मिलेगी.
दूसरा भाव बताया गया है पंचम भाव में राहु के लिए तो हम पहले भी एपिसोड बन चुके हैं कि यहां पर अगर राहु ग्रह हो तो कारक भी हो जाते हैं उनका रत्न धारण करना चाहिए उनके उपाय करने चाहिए तो वह बहुत अच्छा फल भी देते हैं भले अन्य स्थानों पर फल कम प्राप्त होगा लेकिन इस स्थान पर फल अवश्य ही प्राप्त होगा लेकिन यदि यहां पर को राहु ग्रह बैठते हैं तो वह भी समय-समय पर व्यक्ति को पीड़ा देते रहते हैं इसके पीछे का कारण क्योंकि यह भाव होता है पंचम भाव विद्या भाव बुद्धि भाव संतान भाव प्रेम का भाव होता है अब जहां पर व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित हो जाएगी तो समझ लीजिए कि सारे कार्य उसके बिगड़ जाएंगे वह टॉप में भी होगा तो नीचे गिर जाएगा फिर अपने बुद्धि के समय तो यहां पर को बुद्धि भ्रमित करने वाले राहु ग्रह माने जाते हैं विद्या में रुकावट पैदा करते हैं और इस भाव में अगर राहु हो तो पहले तो संतान से संबंधित चिंता रहती है पहले संतान उत्पत्ति में दिक्कत आती है संतान उत्पन्न भी हो गई तो उसे संतान से व्यक्ति जीवन भर पीड़ित रहता है समय-समय पर वह संतान व्यक्ति को पीड़ा देते रहती है जिसे की व्यक्ति टूट जाता है तो यहां पर को बैठे हुए राहु के लिए भी 18000 की संख्या में जाप एक बार अवश्य कर लीजिए जो छोटे-मोटे उपाय हमने दिए हैं चैनल में या कहीं पर भी आपको मिलते हैं उन्हें करते रहिए जो आप कर सकते हैं और इसके अलावा राहु के लिए आप आसानी से परमानेंटली गोमेद रत्न पहन सकते हैं जो हम पहले बता चुके हैं इस बारे में ज्यादा चर्चा हम नहीं करेंगे.
अगला बताया गया है अष्टम भाव इस भाव में बैठे हुए राहु भी व्यक्ति को समय-समय पर पीड़ा देते रहते हैं स्वास्थ्य से संबंधित पीड़ा तो मिलेगी ही मिलेगी सामाजिक मानसिक पीड़ा भी मिलेगी समाज में भी वह पीड़ित रहेगा किसी न किसी तरीके से उसे समान सामाजिक लोगों से अपनी आसपास के लोगों से कष्ट प्राप्त होते रहेगा स्वास्थ्य से संबंधित दिक्कतें तो उसके जीवन में लगी रहेगी क्योंकि यह राहु की विशेषता ही होती है अष्टम भाव में बैठे हुए राहु की क्योंकि यह भाव मारक भाव में आता है जैसे दूसरा भाव मारक भाव माना जाता है और इसको तो सभी लोग जानते हैं कि अष्टम भाव मृत्यु का भी भाव होता है आयु का भी भाव होता है तो ऐसे भाव में बैठे हुए राहु के लिए अवश्य ही उपाय करते रहना चाहिए एक बार पूर्ण संख्या में राहु ग्रह का जाप बहुत बढ़िया तरीके से दान सहित उसके बाद आने वाले 2 साल बाद करें ज्यादा विलंब ना करें जैसे ही आप नजरे हटी दुर्घटना घटी तो उसके बाद 1800 की संख्या में आप पंडित जी लोगों से करवा सकते हैं बहुत आसान है ज्यादा पैसे भी नहीं लगता अगला भाव बताया गया है द्वादश भाव यह भाव जिसे हर कोई जानता है कि खर्च का भाव है यय का भाव है अगर यहां पर को राहु ग्रह बैठ जाए तो समय-समय पर व्यक्ति को हानि करवाते रहेंगे सबसे ज्यादा होता है इसमें मान हानि होता है की अपनी सामाजिक तौर पर मत करें व्यक्ति को अपना कोई उसका कोई सम्मान नहीं रहता जो उसने कमाया होता है सम्मान वह किसी न किसी रूप में कोई ना कोई ऐसा कलंक या कोई ऐसी चीज लग जाती है जिसके ऊपर भी वह सब चला जाता है धन को तो छोड़िए धन तो आदमी फिर कमा लेगा लेकिन एक बार मान सम्मान यदि व्यक्ति का चला गया तो उसको कमाने में व्यक्ति को सदियाँ लग जाती हैं.
