ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प, पितृदोष एवं राहु, केतु ग्रह जनित पीड़ा अत्यंत ही हानिकारक कष्टदायक मानी जाती है बिरले भाग्यशाली मनुष्य ही इस पीड़ा से मुक्ति प्राप्त कर पाते हैं अन्यथा मनुष्य जीवन के अंत समय तक इनकी पीड़ा उसे हमेशा ही किसी न किसी तरह से पीड़ित अवश्य ही रहते हैं इनकी पीड़ा जब चरम सीमा पर हो तो मृत्यु समान कष्ट दाई बन जाती है
जान लेने वाले दोष के तौर पर देखे जाते हैं यह दोष
ऐसा भी देखा गया है इन दोनों के भीतर जब मनुष्य अपनी जीवन लीला समाप्त करने तक की सोचने लगता है। इन दोनों का यदि शीघ्र निवारण ना हो तो यह दोस्त व्यक्ति विशेष को चारों ओर से तबाह कर देते हैं सुख चैन छीन लेते हैं कष्ट समस्याएं हमेशा सर पर बनी रहती हैं हमारे शास्त्रों में इन दोषों के निवारण हेतु भले ही वह काल सर्प दोष हो पितृदोष हो राहु केतु ग्रह जनित बना दोष हो बहुत ही सरल सिद्ध आसान और तुरंत फल देने वाले उपाय बताए गए हैं विशेष पर्व में करने हेतु भी बताए गए हैं यदि कोई जातक श्रद्धा पूर्वक इन बधाई उपायों में से कोई भी उपाय करता है तो अवश्य ही उपाय उसके लिए फलीभूत होता है और प्रतिपल उसके देखने में आता है

नागों का सबसे बड़ा पर्व है नाग पंचमी
आज हम आप लोगों के लिए सावन मास में आने वाले पवित्र पर्व जिसे हम नागों के पर्व के तौर पर भी जानते हैं नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष, पितृदोष ,राहु केतु जनित दोष, ग्रहण दोष आदि निवारण हेतु ज्योतिष शास्त्र में बताया गया एक सरल सा किसे कोई भी व्यक्ति आसानी से कर सकता है ऐसा उपाय जिसे यदि हम श्रद्धा पूर्वक भाव पूर्वक और उम्मीद पूर्वक कि हम इस दोष से मुक्त होंगे इस भाव से यदि कोई व्यक्ति करता है तो अवश्य ही इन दोनों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है किसी भी प्रकार का दोष यदि किसी व्यक्ति पर है तो उपाय नाग पंचमी के दिन करने के लिए बताया गया है
ऐसे उपाय को करें सही तरह से तो मिलेगी मुक्ति
अत्यंत ही सरल है तो बताया गया है कि एक चांदी का कटोरा ले ले किंतु जो व्यक्ति शादी का कटोरा नहीं ले सकता है तो वह किसी भी कटोरे में एक छोटा सा चांदी का टुकड़ा भी डाल कर इस उपाय को कर सकता है तो छोटा सा चांदी का टुकड़ा डालकर उसमें शुद्ध दूध डालकर कुछ भर दें और उसमें एक चंदन की लकड़ी डुबो दें और इसके ऊपर पर एक नाग और नागिन का सर्प आकृति वाला जोड़ा जोकि चांदी का सिल्वर का तांबें का भी हो सकता है स्वेच्छा अनुसार। रख दें जोकि चंदन की लकड़ी के ऊपर पर हो और आधा डूबा हुआ हो सर्पाकृति वाला नागों का जोड़ा ।
नाग पंचमी पर बेलपत्र, धतूरे का बड़ा है महत्व
अब इसके चारों ओर भीतर से बेलपत्र या धतूरे के पत्तों का घेरा बना लें ताकि यह नाग नागिन का जोड़ा सिर्फ ऊपर से बीच से ही दिखाई दे अब इसे अपने घर पर नागपंचमी के दिन स्वयं सिद्ध कर लें इसके सम्मुख सामने बैठकर सभी देवी देवताओं का ध्यान करने के पश्चात नाग स्तुति सर्प सूक्त का पाठ शिव स्तुति मां मनसा देवी स्तुति ध्यान महामृत्युंजय मंत्र जाप आदि आप कर सकते हैं
ॐ नमः शिवाय मंत्र से बढ़कर कोई मन्त्र नहीं
अन्यथा मात्र 1008 की संख्या में ओम नमः शिवाय मंत्र का यदि श्रद्धा पूर्वक जाप किया जाए और संभव हो सके तो हर मंत्र के साथ नाग नागिन के जोड़े के ऊपर बेलपत्र अर्पित किए जाएं और उसके पश्चात इसे नजदीक के किसी दक्षिण दिशा के संभव हो सके शिव मंदिर में अन्यथा नजदीक के किसी भी शिव मंदिर में ले जाकर वहां पर को नियम पूर्वक पूजा-पाठ आदि कर शिवलिंग के समीप इसे आप अर्पित कर दें छोड़ दें यदि वहां पर को पंडित जी आदि बैठे हुए हो तो उनसे
महामृत्युंजय मंत्र जाप भी करना रहता है श्रेष्ठ
महामृत्युंजय पाठ क्या अन्य पाठ अवश्य ही करवा लेना चाहिए शांतिपाठ अवश्य करवा लेना चाहिए तो नाग पंचमी के दिन प्रात काल नहा धोकर यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इस उपाय को करता है ऐसे बहुत से उपाय हैं कोई भी किया जा सकता ज है तो इसका चमत्कारिक प्रतिफल अपने जीवन में अवश्य ही देखता है। धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें

