ज्योतिष शास्त्र में कई योग दोष कारी माने गए हैं जिन्हें अपने अनुकूल बनाना या उनका निवारण करना हमारे संपूर्ण जीवन को सुखी निरोगी एवं संपन्न बनाने में महत्वपूर्ण होता है ऐसे ही एक दोष पितृदोष के बारे में हम आज आप लोगों को बताएंगे कि आखिर पित्र दोष है क्या और कैसे हमें जानना चाहिए कि यह हमें है या नहीं इसे जानने का सबसे आसान सरल तरीका है
1 मात्र जरिया है जन्म पत्रिका पितृदोष है या नहीं जानने के लिए

हमारी जन्मपत्रिका इसके अतिरिक्त कुछ दैवीय लक्षण जो हममें या हमारे परिवार के भीतर देखने में आते हैं यह बता देते हैं या जन्मपत्रिका हमें बता देती है कि हम पित्र दोष से ग्रसित हैं या नहीं है तो उपाय हमें अवश्य ही करना चाहिए नहीं है तो भगवत भजन हमें अवश्य करना चाहिए जन्म पत्रिका के अनुसार यदि जन्मपत्रिका में कालसर्प दोष का निर्माण हो रहा है यानी कि सारे ग्रह राहु और केतु के बीच में आ गए हो किंतु कुछ ज्योतिषियों का मानना है की शंक्पाल, पद्म, महापद्मा, शंखनाद कालसर्प दोष शुभ फल प्रदान करते हैं तो ऐसी परिस्थिति में जब राहु और केतु के बीच में ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है और यह पित्र दोष की श्रेणी में आता है और माना जाता है तो अवश्य ही पितरों को प्रसन्न करने हेतु हमें निरंतर पूजा-पाठ उपाय आदि करनी चाहिए पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण आदि जो इसके अधिकारी लोग हैं उन्हें अवश्य ही करना चाहिए दूसरा ऐसा लक्षण बताया गया है जब राहु के साथ सूर्य या चंद्रमा बैठ जाएं या केतु के साथ बैठ जाएं सूर्य चंद्रमा तो यह स्थिति ग्रहण दोष के भीतर आती है तो यह भी पितृदोष की श्रेणी में आता है और पित्र दोष माना जाता है


सूर्य और चंद्रमा की नीचस्थ स्थिति भी प्रकट करती है पितृदोष
इसके अतिरिक्त सूर्य ग्रह की नीच अवस्था यानी की तुला राशि और विशेष तौर पर 6 8 12 भाव में हो तो अत्यंत ही दोष कारी पित्र दोष माना जाता है इसी तरह से चंद्रमा भी यदि अपनी नीच राशि वृश्चिक राशि में स्थित हो और 6 8 12 भाव में स्थित हो तो यह पित्र दोष की श्रेणी में आता है 6 8 12 भाव में स्थित होना अत्यंत ही खराब फल देने वाला माना जाता है और यहां तक कि बहुत से ज्योतिषी मंगल ग्रह शनि ग्रह बुध ग्रह की स्थिति को देखते हुए भी पितृदोष बताते हैं किंतु यह उचित नहीं है बहुत सी जगह पर हमारे विद्वान ज्योतिषियों द्वारा यह भी बताया गया है कि यदि मंगल जिसे देवी स्वरूप माना गया है यदि 6 8 12 भाव में नीच राशि में हो यानी कि कर्क राशि में तो यह भी पित्र दोष को प्रकट करता है और यदि ऐसी समस्या हमें हो लक्षणों में लग रहे हो तो अवश्य ही पित्र दोष से संबंधित उपाय आदि हमें कर लेनी चाहिए अंतिम निर्णय ज्योतिष से भलीभांति अपनी जन्म पत्रिका का विश्लेषण करवा कर ही जानना चाहिए अधिक जानकारी आप क्लिक करके भी प्राप्त कर सकते हैं धन्यवाद

