विनाशकारी यह बेल करती है विनाश राहु केतु ग्रह की पीड़ा का और हमारे भयंकर से भयंकर कष्टों का

अद्भुत अविश्वसनीय अलौकिक दिव्य है ज्योतिष शास्त्र और इसमें बताई गई जानकारी मनुष्य जाति के लिए वरदान स्वरूप है और इस कलि के युग में बताई गई जानकारी हर क्षण सत्य सिद्ध साबित हो रही है ज्योतिष शास्त्र की किसी भी विधा से ही हम क्यों नहीं कार्य करें अपने जीवन में लागू करें हमें उसका प्रतिफल अवश्य ही प्राप्त होता है ज्योतिष शास्त्र में रत्न धारण जड़ी धारण यंत्र धारण का विशेष महत्व व चमत्कारी प्रतिफल माना गया है और अपनी किसी भी बड़ी से बड़ी समस्याओं के समाधान हेतु अत्यंत सरल माध्यम भी इसे ही माना जाता है

अमर बेल विनाशकारी है लेकिन हमारे महाकष्टों के लिए

तो आज हम आपको 1 ऐसी जड़ी बेल के बारे में बताएंगे जिसे माना तो विनाशकारी जाता है लेकिन सही इस्तेमाल करने से अपनी बड़ी से बड़ी विपदाओं का भी विनाश हम मनुष्य इस बेल से आसानी से कर सकते हैं हम बात कर रहे हैं अमर बेल के बारे में।अमर बेल वह बेल है जो किसी भी वृक्ष के ऊपर स्वयं जन्म ले लेती है और उस वृक्ष पेड़ को धीरे धीरे समाप्त करना शुरू कर देती है इसलिए इसे विध्वंसकारी विनाशकारी कहा जाता है हमारे आयुर्वेद में इसका उपयोग अत्यंत जटिल व असाध्य रोगों की पीड़ा शमन हेतु किया जाता है किन्तु हम आज ज्योतिष शास्त्र में इसका उपयोग किस प्रकार अपनी समस्याओं के समाधान हेतु किया जाता है आप लोगों को बताएंगे। ज्योतिष शास्त्र में इसका उपयोग राहु केतु ग्रह की भयंकर पीड़ा से मुक्ति हेतु एवं भूत प्रेत बाधा, काला जादू टोना से मुक्ति एवं अज्ञात दैवीय बाधा जो कि हमें आगे बढ़ने से रोकती है बांध देती है हमें हमारे कार्यो को और भी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त हेतु किस प्रकार किया जाता है आप लोगों को बताएंगे।

समुद्र मंथन से जुड़ा है इनके साथ रिश्ता

राहु ग्रह द्वारा समुद्र मंथन में छल द्वारा देवताओं का रुप धारण कर उनकी पंक्ति में बैठकर अमृत पान किया गया किन्तु सूर्य व चन्द्रमा द्वारा पहचानने पर भगवान श्रीहरि विष्णु को सूचना दी गई मोहनी रूप में देवताओं को अमृत पान करा रहे भगवान श्री हरि विष्णु द्वारा राहु ग्रह का सर धड़ से अलग कर दिया गया किन्तु तब तक अमृत राहु के कंठ से नीचे जा चुका था और वह स्वयं के कर्म द्वारा 2 हिस्सों में बट गया कंठ से ऊपर का हिस्सा राहु कहलाया और नीचे का हिस्सा केतु। किन्तु अमृत पान से दोनों अमर हो गए और जिस पर भी अपनी दृष्टि डालने लगे उसका विनाश करना शुरू कर दें इसी कारण अमर बेल को इनकी पीड़ा व अन्य स्वभाव गुण से संबंधित पीड़ा हेतु अचूक उपाय माना जाता है तो हम आपको बताएंगे कि किस तरह से अमर बेल के प्रयोग से हम राहु केतु ग्रह की पीड़ा से मुक्ति प्राप्त एवं अन्य बाहरी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं

मोरपंखी की शाखा टहनी भी है अत्यंत महत्वपूर्ण

बताया गया है कि किसी दिन मूहूर्त में अमर बेल को आप लेकर आए और साथ में मोरपंख के पेड़ वृक्ष की 1 शाखा टहनी भी लेकर आएं और अमर बेल को मोरपंखी की टहनी पर लपेट दें और इसे अपने निवास स्थान पर घर के बाहर पश्चिम दक्षिण दिशा में बाहर से टांग दें लटका दें ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार हम अपने घर को नजर दोष वास्तु दोष से बचाने हेतु त्रिकोण काला कपड़ा लाल कपड़ा जो झण्डा स्वरूप होता है का इस्तेमाल करते हैं या हम घर की छतों में घड़े मटके को काले रंग से रंगने के बाद भैंसें आदि को बनाकर लगाते हैं ठीक उसी प्रकार और तब तक इसे रहने दें जब तक यह पूर्णतया सूख नहीं जाता है और इसके पश्चात जब यह सूख जाए तो

यह 3 दिन होते हैं इनके कष्टों से मुक्ति हेतु महत्त्वपूर्ण

इसे रविवार, बुधवार विशेष अन्यथा शुक्रवार को किसी भी समय विशेष सांयकाल के समय घर से दूर किसी दोराहे, तिराहे, चौराहे या एकान्त सूनसान स्थान पर ले जाकर किसी ज्वलनशील पदार्थ जैसे कैरोशिन पैट्रोल डीजल या मदिरा का इस पर छिड़काव कर इसे जला दें भस्म कर दें और इसके पश्चात सीधे अपने घर की ओर चले आए पीछे मुड़कर नहीं देखें और घर के भीतर प्रवेश करने से पहले अपने हाथ पांव को पानी से धो लें स्वच्छ कर लें । आप स्वयं महसूस करेंगे कि आप की समस्या धीरे धीरे समाप्त की ओर चली जा रही है और अतिशीघ्र ही आपकी सम्बन्धित समस्या का अंत ही देखने को मिलता है जानकारी पर अवश्य अमल कर इसे सम्बंधित व्यक्ति लागू करें तो फल की व्याख्या करते करते नहीं रूकेगा। अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें धन्यवाद

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