करिश्माई ग्रह राहु को प्रसन्न करने हेतु इस देवी मां व इस देवता का ध्यान तकदीर का पासा पलट देने वाला माना गया है

ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों को प्रसन्न करने अपने अनूकूल बनाए रखने हेतु ढेरों प्रकार के उपाय बताए गए हैं और जो कोई भी व्यक्ति इन उपायों को अपनी समस्या के अनूरूप विश्वास पूर्ण तरीके से इस्तेमाल करता है तो अवश्य ही लाभान्वित होता है अद्भुत चमत्कारी परिणाम भी वह प्राप्त करता है ज्योतिष शास्त्र में कुछ 1 ग्रह अत्यंत ही कठोर व तुरंत फल व दण्ड देने वाले माने जाते हैं

राहु चाहे तो आपके वारे न्यारे कर सकते हैं

इनमें से एक ग्रह जिनके बारे में हम आज आपको इन्हें प्रसन्न करने हेतु उपाय बताएंगे वह करिश्माई ग्रह है राहु ग्रह जिनके नाम से ही अच्छे खासे मजबूत प्रभावशाली व्यक्ति भी भयग्रस्त हो जाते हैं वह इनकी पीड़ा शमन हेतु तमाम तरीके के उपाय करने लगते हैं कई ज्योतिषियों से विचार विमर्श करना शुरू कर देते हैं राहु ग्रह का व्यक्तित्व व फल ही कुछ ऐसा है इन्हें प्रसन्न करने एवं अपने अनूकूल बनाए रखने हेतु ज्योतिष शास्त्र में अनेकों उपाय बताए गए हैं और जो व्यक्ति श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इनको करता है तो अवश्य ही लाभान्वित होता है।आज हम आप लोगों को बताएंगे कि यह किस आदि शक्ति देवी के स्मरण से व किस साक्षात् फल देने वाले देवता का ध्यान करने मात्र से ही जातक पर प्रसन्न हो अपनी चमत्कारी कृपा दृष्टि बना कर उसे सर्व सुख देने के साथ जीवन में ऊंचाईयों पर पहुंचा देते हैं

आराध्य मानी जाती है राहु ग्रह की यह देवी मां


ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि जब राहु ग्रह की स्थिति जन्म कुण्डली में खराभ अशुभ हो तो व्यक्ति की बुद्धि विपरीत उल्टी खराब हो जाती है और वाणी से शब्द विष के समान निकलने लगते हैं जिससे उसके सभी कार्य बिगड़ने लगते हैं सभी बने बनाए रिश्ते टूटने लगते हैं मनुष्य अपने आप को दुःख कष्टों के चक्रव्यूह में फंसा हुआ महसूस करने लगता है तो ऐसी परिस्थिति में बताया गया है कि बुद्धि ज्ञान वाणी की देवी मां सरस्वती का ध्यान यदि ऐसा जातक करता है तो अवश्य ही वह राहु ग्रह के इस चक्रव्यूह से निकल जाता है और साथ ही राहु ग्रह की मायावी शक्तियों से लाभान्वित होकर 1 नए जीवन के साथ ऊंचाईयों को छूने की ओर अग्रसर होता है

नियमित जो ध्यान करे राहु उसका कल्याण करे

कई ग्रंथों में तो राहु ग्रह की प्रिय अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को बताया गया है जिनकी आराधना करने से राहु ग्रह कभी भी जातक को परेशान नहीं करते व अपना शुभ चमत्कारी फल जातक को प्रदान करते हैं मां सरस्वती जी की आराधना प्रातः काल करना सर्वोत्तम माना गया है दूसरा राहु ग्रह को प्रसन्न करने हेतु एवं अपने अनूकूल बनाने हेतु बटु भैरव स्तोत्र पाठ करना एवं बटु भैरव का ध्यान करना बताया गया है बटु भैरव जो कि भगवान भोलेनाथ के रूप माने जाते हैं और भगवान भोलेनाथ को राहु ग्रह अपना इष्ट देव व अपना गुरु मानते हैं तो इनकी आराधना सांयकाल करने से राहु ग्रह अत्यंत प्रसन्न होकर जातक को मनवांछित फल प्रदान करते हैं एवं कभी भी किसी भी प्रकार का कोई कष्ट नहीं देते हैं 1 प्रकार से वह जातक के रक्षक बन जाते हैं।

श्रद्धा पूर्वक कुछ समय जाप करने से मिल जाता है फल

माता सरस्वती को प्रसन्न करने हेतु उनके मन्त्रों का जाप करना चाहिए अन्यथा श्री मां सरस्वतये नमः इस मन्त्र की 1 माला या 3 माला या इससे अधिक माला का प्रतिदिन प्रातः काल जाप करना चाहिए 1 माला 108 की होती है यह तो हम सभी लोग जानते हैं।
और बटु भैरव की आराधना हेतु बटु भैरव स्तोत्र पाठ करना चाहिए अन्यथा ॐ बटु भैरवाय नमः इस मन्त्र की भी 1 माला या 3 माला का जाप सांयकाल में अवश्य ही करना चाहिए जो जातक नियमित रूप से मां सरस्वती एवं बटु भैरव का ध्यान रोज करता है उसका जीवन सुखमय बन जाता है कभी भी राहु ग्रह की पीड़ा उसे नहीं भोगनी पड़ती है जिसके जीवन में राहु ग्रह का शुभ प्रभाव पड़ जाए तो उसके वारे न्यारे हो जाते हैं। ऐसा है राहु ग्रह का प्रभाव हमारे जीवन में। हम उम्मीद करते हैं आप जानकारी पर अमल करेंगे और राहु ग्रह का शुभ फल प्राप्त करेंगे इस विषय पर अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें धन्यवाद

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