घर परिवार से अलग कर देता है शंखपाल कालसर्प योग

अन्नतं वासुकिं शेषं पघ्मनाभं च कम्बलम् शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् ।सायड्काले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।
शंखपाल कालसर्प योग जब चतुर्थ भाव में राहु ग्रह और दशम भाव में केतु ग्रह के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो शंखपाल नामक कालसर्प योग बनता है । इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को जीवन में सुख बहुत कम ही मिल पाता है

घर परिवार से पृथक कर संकट में ले आता है

विद्याध्ययन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इस योग के प्रभाव से व्यवसाय नौकरी रोजी रोटी इत्यादि पक्षों में रुकावटें बनी रहती है जीवन में लाभ कम नुकसान ज्यादा प्राप्त होता है घाटे का सामना करना पड़ता है वाहन एवं भृत्यों तथा कर्मचारियों निकटतम सम्बन्धियों को लेकर कोई न कोई समस्या हमेशा आती है आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि दिवालिया होने तक की परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है इस योग से बचाव मुक्ति हेतु बताया गया 1 मात्र सिद्ध उपाय यह है कि प्रतिदिन बहते हुए जल में दूध बहाएं। बहता हुआ जल यदि पहुंच से दूर हो महिने में 3 बार अवश्य ही इस उपाय को करें। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो द्वारा देखने हेतु ब्लू लाइन शब्दों को टच करें धन्यवाद

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