भ्रमित मनुष्य की पहचान है पद्म कालसर्प

अन्नतं वासुकिं शेषं पघ्मनाभं च कम्बलम् शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा। एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् सायड्काले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।
पद्म कालसर्प योग जब पंचम भाव में राहु ग्रह और एकादश भाव में केतु ग्रह हो और सभी ग्रह इनके बीच आ जाए तो पद्म नामक कालसर्प योग बनता है इस योग के कारक मनुष्य में हमेशा बुद्धि भ्रम बना रहता है व्यक्ति के द्वारा लिए गए निर्णय हमेशा ही गलत साबित होते हैं अपने द्वारा लिए गए निर्णयों से भारी आर्थिक सामाजिक हानि उठानी पड़ती है

सन्तान से हमेशा ही समस्या रहती है

सन्तान सुख में कमी या सन्तान का अपने से दूर होना सन्तान से सम्बन्ध विच्छेद होने का फल भी इसी कालसर्प योग में भोगना पड़ता है गुप्त रोगों से व्यक्ति घिरा रहता है असाध्य रोग हो सकते हैं चिकित्सा में अत्यधिक धन का अपव्यय होता है दुर्घटना एवं हाथों में तकलीफ हो सकती है मित्रों एवं पत्नी से विश्वासघात होने की संभावना प्रबल रहती है यदि सट्टा जुआ लाटरी की लत हो तो सर्वस्व स्वाहा होने में देर नहीं लगती है शिक्षा प्राप्ति में अनेकों अवरोध आते हैं जातक की शिक्षा भी अपूर्ण रह सकती है

कदम कदम पर मिलता है अपनों से धोखा

जिस व्यक्ति पर सर्वाधिक विश्वास करेंगे उसी से धोखा मिलता है सुख में प्रयत्न करने पर भी इच्छित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है संघर्षपूर्ण जीवन बीतता है। इस योग से बचाव मुक्ति हेतु बताया गया 1 मात्र सिद्ध उपाय यह है कि घर के ईशान कोण पूर्व एवं उत्तर के बीच सफेद हाथी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो द्वारा देखने हेतु ब्लू लाइन शब्दों को टच करें धन्यवाद

1 thought on “भ्रमित मनुष्य की पहचान है पद्म कालसर्प”

  1. Usually I do not read article on blogs however I would like to say that this writeup very compelled me to take a look at and do it Your writing style has been amazed me Thank you very nice article

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