अन्नतं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा। एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् सायड्काले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः।।
महापद्म कालसर्प योग जब षष्ठ भाव में राहु ग्रह और द्वादश भाव में केतु ग्रह हो और सभी ग्रह इनके बीच आ जाए तो महापद्म कालसर्प योग बनता है इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति हमेशा शत्रु बाधा से पीड़ित रहते हैं साथ ही साथ कोई न कोई रोग इन्हें बने रहता है
सुखी जीवन के लिए अभिशाप है महापद्म कालसर्प योग

पत्नी से सम्बन्ध विच्छेद की सम्भावना प्रबल रहती है साथ ही साथ इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति अपने चरित्र में भी किसी न किसी प्रकार का दाग अवश्य ही लगा लेते हैं जिस कारण समाज में मान सम्मान इन्हें प्राप्त नहीं हो पाता है शत्रु से हमेशा ही इन्हें पराजय प्राप्त होती है जीवन में बेफिजूल की यात्राएं इन्हें करनी पड़ती है आत्मबल हमेशा गिरा हुआ रहता है इस योग से बचाव मुक्ति हेतु बताया गया 1 मात्र उपाय यह है कि प्रत्येक माह की पंचमी तिथि को एक नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो द्वारा देखने हेतु ब्लू लाइन शब्दों को टच करें धन्यवाद



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