ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को काल पुरुष की वाणी और बुद्धि माना गया है इनके संबंध में कुछ बातें उल्लेखित हैं
बुध ग्रह की पौराणिक जानकारी
देव गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा को उनके शिष्य चंद्रमा भगा के ले गए थे जिस कारण ताड़का में युद्ध हुआ चंद्रमा का पक्ष उशना रुद्र यानी की शिव तथा दानवों ने लिया और देव बृहस्पति का इंद्र आदि देवताओं ने लिया इस प्रकार जब देवासुर संग्राम ने उग्र रूप धारण किया तो पृथ्वी को भी विचलित कर दिया तब पृथ्वी ने ब्रह्मा से युद्ध का अंत करवाने की प्रार्थना की ।ब्रह्मा ने बीच-बचाव कर तारा को उसके पति वृहस्पति को लौटा दिया इसी दौरान तारा के गर्भ से जो पुत्र उत्पन्न हुआ था उसे वृहस्पति और चंद्र दोनों ने अपना अपना पुत्र बताया लेकिन जब ब्रह्मा ने तारा को बाध्य किया तो उसके रहस्य का उद्घाटन किया कि वह चंद्रमा का पुत्र है आगे चलकर उसका नाम इन्दुसुत अर्थात बुध पढ़ा जो अपने नाम अनुरूप ग्रह कहलाया बुध ने पौराणिक परंपरा के अनुसार वैवस्वत मनु की कन्या इला से विवाह किया।

बुध ग्रह प्रभावित व्यक्ति में दिखते हैं यह गुण स्वभाव
बुध ग्रह का वर्ण हरा आकृति गोल स्वभाव मिश्रित कद सामान्य स्वरूप प्रसन्न तत्व पृथ्वी स्वाद मिश्रित खट्टा मीठा नमकीन गुण राजसिक अवस्था कुमार व लिंग नपुंसक है इनकी प्रकृति वात पित्त कफ की है जाति शूद्र गोत्र अत्री वाहन सिंह रितु शरद व वार बुधवार है
बुध ग्रह को राजकुमार माना जाता है
राज्य में अधिकार राजकुमार का है देश मगध है बुध ग्रह को विष्णु देवता का उपासक माना जाता है इनकी जड़ी विधारा है रत्न पन्ना एवं उपरत्न हरा मरगद हरिपुर मूली पेरिडॉट हरा ओनेक्स है धातु सोना व समिधा अपामार्ग हैक्रीडा स्थल खेल का मैदान या क्रीडा भवन संज्ञा अकेला शुभ युक्त या दृष्ट होने पर अशुभ। निसर्ग बल मंगल से अधिक बली पराभव शुक्र से पराजित बल्ले प्रातः काल से दोपहर तक एवं स्थान शमशान विद्वानों का घर या गांव बली होने पर बुध राहु ग्रह के दोष का संबंध करता है
अर्थशास्त्र एवं व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है बुध
रुचि बुध ग्रह की अर्थशास्त्र अथर्ववेद गणित रसायन शास्त्र शिल्प कला व लेखाशास्त्र में रहती है राशि मिथुन व कन्या राशि का स्वामीएवं कारण विद्या विवेक मामा मित्र बंधु व्यापार। बुध ग्रह की कमजोर स्थिति शरीर में वात पित्त कफ विकार चर्म रोग कारण रोग कुष्ठ रोग घुटनों में दर्द कला एवं वाणिज्य मूत्र रोग उत्पन्न करती है।बुध ग्रह को प्रसन्न करने हेतु निम्नलिखित वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए हरा वस्त्र या नीला वस्त्र खराब सोना चांदी मूंगा कांटा गो पुष्प भी हाथीदह शक्कर कपूर आदि। बुध ग्रह की जन्म कुंडली में शुभ स्थिति व्यक्ति को प्रकृति प्रेमी हंसमुख काव्य संगीत में रुचि प्रेम विनोदी स्वभाव कई भाषाओं का ज्ञान एवं जैसा देश वैसा भेष के अनुसार स्वभाव बदलने में माहिर के साथ सरल स्वभाव कामकाजी विद्वान सुस्त अध्ययन वासी नम्र विनय आत्म विश्वासी हाजिर जवाब होने के साथ-साथ चतुरता भी प्रदान करती है बुध ग्रह की प्रतिकूल व कमजोर स्थिति व्यक्ति को निरंकुश विलासी मद्यपान का शौकीन एवं स्वभाव से जिद्दी कठोर चिड़चिड़ा स्वेच्छाधारी प्रवृत्ति का बना देती है।
मालामाल कर देते हैं इन वर्षों में बुध ग्रह
बुध ग्रह यदि जन्म कुंडली में अत्यंत शुभ स्थिति में हो तो जातक को 32 वर्ष से 36 वर्ष के मध्य में अत्यंत ही शुभ फल प्रदान करता है यह जानकारी अत्यंत लाभ प्रदान करने वाली है पसंद आए तो जरूर आगे बढ़ाकर आप इसे शेयर कर सकते हैं धन्यवाद बुध ग्रह को प्रसन्न करने का अत्यंत सरल आसान उपाय जानने हेतु क्लिक करें


