मंगल ग्रह से प्रभावित व्यक्ति होते हैं ऐसे गुण प्रवृत्ति से युक्त। जाने आप भी मंगल ग्रह के बारे में

ज्योतिष शास्त्र मैं मंगल ग्रह को साहस का देवता कहा जाता है इन्हें युद्ध के देवता कार्तिकेय का ही स्वरुप माना जाता है मंगल देव शिव और पृथ्वी के पुत्र होने से भौम भूमि पुत्र महासुत भी कहलाते हैं मंगल ग्रह को काल पुरुष का पराक्रम माना गया है जो कर्म के फल स्वरुप ही प्राप्त होता है

जानिए क्या आप से मिलता है मंगल ग्रह का स्वरूप


मंगल ग्रह का वर्ण लाल आकृति चतुष्कोण स्वरूप कृशकाय स्वभाव उग्र व कामुक तत्व अग्नि प्रकृति पित्त कद छोटा बताया गया है इनका वाहन मेडा ऋतु ग्रीष्म लिंग इन का पुरुष गुड़गांव स्वाद तीखा अवस्था तरुण एवं राज्य में अधिकार सेनापति का बताया गया है इसके अतिरिक्त इनकी जाति क्षत्रिय गोत्र भारद्वाज शरीर में प्रभाव पेट से पीठ तक धातु ताबा रत्न मूंगा उपरत्न लाल अकीक वार मंगलवार संविदा खैर संज्ञा पापी अशुभ स्थान पर्वतीय अरणीय इनके देवता हैं

मंगल प्रभावित व्यक्ति की रुचि रहती है शस्त्र विद्या में

 स्कंध कार्तिकेय दिशा दक्षिण रुचि शस्त्र विद्या एवं इन की जड़ी अनंत मूल बताई गई है यह पराभव में शनि से पराजित व रात्रि में बलि है इनका क्रीडा स्थल दद्दा भूमि वह देश अवंती है स्वामी यह मेष वृश्चिक राशि के हैं वह अशुभ होने पर निम्न रोग जातक को यह देते हैं पित्त विकार जलना गिरना गुप्त रोग चोट चपेट दुर्घटना आदि सूखा रोग उदर विकार अपेंडिसाइटिस आदि रोग।

मंगल ग्रह को प्रसन्न करने हेतु करें यह दान

जन्म कुंडली में इनसे पराक्रम भाई भूमि शत्रु आदि के बारे में आसानी से जाना जा सकता है इनकी अशुभता दूर करने एवं शुभ फल प्राप्त करने हेतु निन्नलिखित पदार्थों का दान करना चाहिए मूंगा गेंहू मसूर लाल बैल तांबा लाल वस्त्र गुड़ कनेर के फूल लाल फूल आदि।

अशुभ होने पर हो जाते हैं अत्यंत खतरनाक मंगल ग्रह


जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति क्रोधी चुगल खोर दुष्ट कठोर कामुक झगड़ालू झूठा लालची चप्पल एवं कपटी होता है अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को हानि पहुंचाने व बदला लेने के लिए वह हिंसक अन्यायी व अधर्मी भी बन जाता है।
और यदि शुभ स्थिति में हो तो दयालु भला करने वाला साहसी शांत विनम्र एवम धार्मिक होता है नेतृत्व करने की आकांशा ऐसे जातक मैं प्रबल होती है और हमेशा ही अपनी बात पर अडिग रहता है

मंगल बली हो तो इन वर्षों में रहते हैं जातक पर पूर्ण मेहरबान 


जन्म कुंडली में मंगल के सर्वाधिक बली होने एवं कारक होने की स्थिति में मंगल ग्रह का 28 वें वर्ष से 32 वें वर्ष के मध्य में विशेष शुभ फल प्राप्त होता है मंगल ग्रह संबंधित या जानकारी यदि आप लोग को पसंद आए तो जरुर इसे आगे बढ़ाकर आप शेयर कर सकते हैं धन्यवाद। मंगल ग्रह को प्रसन्न करने हेतु जानने के लिए क्लिक करें

 

Leave a Comment