यह 7 राशियां आंख बन्द करके धारण कर सकती है फिरोजा किसी से पूछने की जरूरत नहीं है

रत्न जब काम करते हैं तो किसी चमत्कार से कम नहीं करते हैं मनुष्य की सोच बदलते हैं नया मार्ग दिखाते हैं और भाग्य स्वयं बदलने लगता है ऐसा ज्योतिष शास्त्र में स्पष्ट तौर पर कहा जाता है हर ग्रह का अपना 1 रत्न है और साथ में उपरत्न भी है रत्न महंगा होने के कारण जो व्यक्ति धारण नहीं कर सकता है वह उपरत्न धारण कर सकता है क्योंकि यह रत्न की अपेक्षा काफी सस्ता होता है इनमें से कुछ उपरत्न तो रत्न से भी ज्यादा फल देने वाले होते हैं

उपरत्नों का राजा कहते हैं इसे

ऐसे ही 1 रत्न के बारे में आज हम आप लोगों को बताएंगे। यह उपरत्न कोई और नहीं शुक्र ग्रह का उपरत्न फिरोजा है जिसे उपरत्नों का राजा कहा जाता है यह एक ऐसा उपरत्न है जिसे कोई भी धारण कर सकता है लेकिन फिर भी ज्योतिष शास्त्र में कुछ राशियां ऐसी बताई गई है जो राशियां आंख बंद करके फिरोजा को धारण कर सकती हैं यह 7 राशियां हैं जिन्हें किसी से भी पूछने की जरूरत नहीं है फिरोजा धारण करने के लिए। इनमें से पहली राशि है वृषभ राशि इसके स्वामी शुक्र ग्रह है जिनका तो यह रत्न ही है अतः इस राशि के लोगों को तो कहीं पूछने की जरूरत ही नहीं है बेहिचक फिरोजा धारण कर सकते हैं दूसरी राशि है

7 राशियों के व्यक्ति के लिए वरदान है यह

मिथुन राशि इसके स्वामी बुध ग्रह है और शुक्र ग्रह की बुध ग्रह के साथ मित्रता है कुण्डली में तो अक्सर पंचधा मैत्री के अनुसार परम मित्रता बन ही जाती है अतः इस राशि के लोग भी निशंकोच फिरोजा रत्न धारण कर सकते हैं तीसरी राशि है कन्या जिसके स्वामी ग्रह भी बुध ग्रह ही है अतः इस राशि के जातकों द्वारा भी किसी से पूछने की जरूरत नहीं है कि फिरोजा धारण करें या नहीं अवश्य ही धारण करना चाहिए चौथी राशि है तुला जिसके स्वामी ग्रह फिरोजा के मालिक शुक्र ग्रह ही है तो इस राशि वालों ने तो आंख मूंद कर फिरोजा रत्न को धारण करना चाहिए। पांचवीं राशि है मकर जिसके स्वामी न्याय के देवता शनि ग्रह है

शनि ग्रह वह शुक्र ग्रह है एक दूसरे के पूरक

 शनि ग्रह के साथ भी शुक्र ग्रह की मित्रता है कुण्डली में पंचधा मैत्री के अनुसार लगभग परम मित्रता बन ही जाती है अतः इन्हें भी किसी से पूछने की जरूरत नहीं है बेझिझक किसी रोक टोक के यह भी फिरोज रत्न धारण कर सकते हैं छठवीं राशि है कुंभ इसके मालिक भी शनि देव ही है तो इन्हें भी क्या किसी से पूछना जितना जल्दी हो सके अवश्य ही फिरोजा रत्न धारण करना चाहिए। सातवीं राशि है मीन। यहां पर बहुत से लोगों को सोचना पड़ सकता है कई लोग प्रतिक्रिया भी कर सकते हैं लेकिन आज हम स्पष्ट कर देते हैं मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति ग्रह है जिनकी दैत्य गुरु शुक्राचार्य यानिकि शुक्र ग्रह से शत्रुता है लेकिन दोनों अपनी अपनी जगह पर गुरु का दर्जा लिए हुए है इस लिए एक दूसरे के भक्तों को यह कष्ट नहीं देते हैं और मीन राशि में शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि में होते हैं सबसे मजबूत स्थिति यही पर इनकी मानी जाती है और दूसरी बात फिरोजा उपरत्न है अतः मीन राशि के जातक भी बिना किसी भय के फिरोजा धारण कर सकते हैं। अब बात आती है इसे किस अंगुली में पहनना चाहिए

दाहिने हाथ का अंगुष्ठ है सर्वोपरि धारण हेतु

फिरोजा को दाहिने हाथ के अंगूठे में सर्वप्रथम कोई परेशानी नहीं हो तो यही पर धारण करना चाहिए। क्योंकि हाथ में यह शुक्र ग्रह का क्षेत्र माना जाता है इसके अलावा अनामिका जिसे रिंग फिंगर भी कहा जाता है इसमें और मध्यमा अंगुली मिडिल फिंगर में भी धारण किया जा सकता है इसके अलावा यदि जन्म कुंडली में बुध ग्रह और शुक्र ग्रह का आपसी स्थान परिवर्तन योग बनता है या किसी प्रकार की युति बन रही हो तो कनिष्ठिका अंगुली लिटिल फिंगर में भी फिरोजा को धारण किया जा सकता है अब बात आती है इसे किस दिन धारण करना चाहिए शुक्र ग्रह का वार शुक्रवार है अतः शुक्रवार को ही इसे धारण करना चाहिए और रात्रि को शुभ समय देखकर नहीं तो 7:30 से 8:30 के मध्य शुभ समय में इसे धारण करना चाहिए। इसका शुद्धिकरण पूजा कैसे करें । सबसे सरल और प्रचलित विधि यह है कि कच्चे दूध में नील ( सफेद कपड़ों में किया जाने वाला रंग ) डालकर इसे कुछ समय उसमें डूबा दें उसके पश्चात इसे निकालकर साफ कपड़े से पोछ कर सभी देवी-देवताओं का ध्यान विशेष रूप से माता रानी एवं शुक्र ग्रह का ध्यान करते हुए इसे धारण करना चाहिए

18 दिन की पवित्रता से बन जाता है विशेष चमत्कारी

18 दिन तक पवित्रता का ध्यान रखें और नियमित माता रानी और शुक्र ग्रह का ध्यान इन दिनों में अवश्य ही करें। इतना यदि आप करते हैं तो यह आपके लिए एक चमत्कारी रत्न बन जाता है और आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला अमर मणि बन जाता है इसकी हम जितनी तारीफ करें उतनी ही कम है। इस विषय पर अधिक जानकारी वीडियो के माध्यम से देखने हेतु यहां क्लिक करें धन्यवाद

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