रत्न धारण करना हर व्यक्ति चाहता है मन में इसे धारण करने की अभिलाषा हर किसी व्यक्ति में होती है वह मानता है कि इसे धारण करने से कुछ न कुछ तो होगा ही भले ही वह कुछ हो या नहीं हो नहीं हो का तात्पर्य गलत रत्न धारण करने से है। सही रत्न पहनने के बाद इतना तो जरूर है पहनने वाले के जीवन में कुछ न कुछ बदलाव जरूर होता है।
रत्न धारण करने पर भी कई प्रकार की भ्रान्तियां है
रत्न धारण में भ्रान्तियों से दूर रहें

आज आपको इनके बारे में बताएंगे।
कुछ विद्वान ज्योतिषियों का मानना होता है कि रत्न धारण हमेशा मजबूत बली शुभ विशेष रूप से लग्नेश, पंचमेश, भाग्येश राशि स्वामी में से जो शुभ हो उसका रत्न धारण करना चाहिए।
कुछ विद्वान ज्योतिषीयों का मानना होता है कि लग्नेश, पंचमेश, भाग्येश राशि स्वामी में से किसी का भी रत्न लाभ की स्थिति को देखते हुए करना चाहिए।
कुछ विद्वान ज्योतिषीयों का मानना होता है कि जो त्रिकोण एवं राशि स्वामी में सबसे कमजोर फल दे रहा है उसका रत्न धारण करना चाहिए। यही पर कुछ ज्योतिषियों का मत इसके विपरीत रहता है ।

विद्वान अनुभवी ज्योतिषीय मत पर रत्न धारण करें

उनका मानना होता है कि कमजोर अशुभ ग्रह अपने फल में वृद्धि करता है और ज्यादा खराब फल प्रदान करता है तो इनका रत्न धारण नहीं करना चाहिए। दूसरा ज्योतिषियों का मानना होता है कि इनका रत्न धारण करने से अशुभ फल का शमन होता है और ग्रह रत्न शुभ फल प्रदान करता है
इसके अतिरिक्त बहुत से ज्योतिषी व़िशोतरी महादशा या अन्य महादशा स्वामी के रत्न धारण करने की भी राय देते है
ओर बहुत से रत्न धारण तो ग्रह युति पर भी धारण करने की सलाह भी देते हैं कुल मिलाकर
सही रत्न धारण करना अपने आप में टेरी खीर है सही रत्न धारण सिर्फ और सिर्फ वही अनुभवी ज्योतिष जो गणित विद्या के साथ फलित विद्या में भी पारंगत हो साथ ही कई वर्षों का रत्न धारण कराने का लम्बा अनुभव उसके पास हो।
रत्न धारण करते समय भार का ध्यान अवश्य रखें

सहीरत्न धारण में रत्न के भार का बहुत बड़ा महत्व है सही रत्न भार उसे जीवन पर्यन्त पूर्ण फल प्राप्त करवाता है सही रत्न हो पर भार गलत हो तो रत्न फलदाई होते हुए भी निष्क्रिय रहता है रत्न भार का निर्धारण वजन या उम्र से नहीं किया जाता है वजन ऊपर नीचे हो जाता है एवं उम्र प्रतिदिन बढ़ती ही जाती है इसका सही निर्धारण कुण्डली चक्र में ग्रह की स्थिति भाव पर निर्भर करती है क्योंकि भाव में स्थित ग्रह हमेशा वही पर स्थित रहेगा गोचर में ग्रह का भ्रमण का वास्तविक स्थिति पर कभी भी प्रभावित नहीं रहता है।
ज्योतिषीय मत ही सर्वोपरि है रत्न धारण में

इसके अलावा कुछ ज्योतिष ग्रह के गोचर स्थिति के अनुसार भी रत्न धारण करने की राय देते हैं जो पुर्ण जोखिम कारी रह सकती है अतः यहि आप कुण्डली के अनुसार या अन्य विधि के अनुसार सही रत्न जिसका लाभ प्राप्त हो तो धारण करना चाहते हैं तो 1 विद्वान अनुभवी ज्योतिष ही आपका सही मार्गदर्शन कर सकता है इस विषय पर अधिक जानकारी हेतु ब्लू लाइन शब्दों को टच करें धन्यवाद

