ज्योतिष शास्त्र ही 1 मात्र शास्त्र है जो मनुष्य के जीवन में अदृश्य शक्ति के रूप में फेरबदल बदलाव कर सकता है जब मनुष्य को अपनी हार निश्चित लगती है उस स्थिति में ज्योतिष शास्त्र उसकी हार को जीत में बदलने वाला 1 अकेला जरिया है किन्तु आज के भौतिकतावाद की लहर ने मनुष्य को इसके चमत्कारी परिणामों से दूर रखा हुआ है जो इसकी महत्ता को जान लिया उसका जीवन परिपूर्ण सुखी जरूर बना है

बिना कुंडली के सिर्फ अपने लक्षणों से कैसे है गुरु
आज आप लोगों को बिना जन्मकुंडली दिखाए एवं किसी अन्य माध्यम से जाने बिना सिर्फ इन लक्षणों व अनुभवों के माध्यम से पता लगा सकते हैं कि हमारे गुरु ग्रह कैसे है शुभ या अशुभ। कमजोर हैं या बलवान। इस लेख में बताएंगे।


शान्ति व सद्भावना पसंद करते हैं गुरु
ज्योतिष शास्त्र में गुरु वृहस्पति को देवगुरु बृहस्पति कहा गया है गुरु की स्थिति सबसे ज्यादा शुभ उस जगह पर मानी जाती है जिस जगह पर शान्ति हो कहने का तात्पर्य यह है कि जिस जातक के गुरु ग्रह शुभ होंगे उसके जीवन में परिवार में शान्ति कायम अवश्य ही रहती है यहां तक गुरु बली जातक जहां जाता है शान्ति सद्भावना सुआचरण आदि उसे अवश्य प्राप्त होता है यदि इसके विपरीत गुरु ग्रह कमजोर अशुभ हों तो जीवन में परिवार सभी स्थानों पर अशांति बनी रहेगी कलह का वास रहेगा गलत मार्ग संगति की ओर पथचलन रहेगा।

सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं तो गुरु दोष है
दूसरी अशुभ स्थिति में गुरु ग्रह को तब जानें जब हमारे पास सर्व संसाधन होते हुए भी हमें उनका कोई लाभ नहीं गन्दी गलत जगह पर वास करना पड़ रहा हो अनुकूल हुई चीजें भी प्रतिकूल बन जाए तो अवश्य ही जानना चाहिए गुरु ग्रह अत्यंत ही कमजोर अशुभ है इसके विपरीत कुछ नहीं होते हुए भी यदि हमें सब कुछ समय के हिसाब से प्राप्त हो रहा है कहीं भी कार्य में अड़चन नहीं है व चीजें प्रतिकूल होते हुए भी समय के साथ अनुकूल हो जाएं तो हमारे गुरु ग्रह अत्यंत ही शुभ फलदाई है

विद्या बुद्धि के बल पर शिखर तक पहुंचाने वाले 1 मात्र ग्रह
गुरु ग्रह को विद्या, ज्ञान देने वाला ग्रह कहा गया है यदि विद्या, बुद्धि उच्च स्तरीय हो विद्या में कोई रुकावट पैदा नहीं हुई हो ग्रहण विद्या ही आजिविका का माध्यम हो समाज में सम्मान यश प्राप्त हो तो गुरु ग्रह को शुभ जानें इसके विपरीत यदि विद्या में भटकाव रहा है अलग-अलग स्थानों से विद्या ग्रहण की हो या विद्या अपूर्ण रही हो बुद्धि भी कमजोर हो तो जानिए गुरु ग्रह कमजोर है साथ ही साथ ऐसा भी माना गया है कि यदि बाल्यकाल में पीलिया टाइफायड आदि रोग हो जाए तो भी गुरु को कमजोर जानें इसके अतिरिक्त
ऐसा है तो मान लीजिए गुरु ग्रह है अत्यंत कमजोर
1 ऐसी विशेषता जो स्पष्ट कर देती है कि जातक के गुरु ग्रह कैसे है शुभ या अशुभ। यदि जातक का ईश्वर के प्रति विश्वास है आस्था है धार्मिक प्रवृत्ति यदि पूर्णतया यदि हो जातक की तो अवश्य ही जानें गुरु ग्रह अत्यंत शुभ है विपरीत इसके यदि नास्तिकता कूट कूट कर यदि जातक में हो तो गुरु से खराब ग्रह दूसरा कोई नहीं।

1 सर्वश्रेष्ठ उपाय गुरु ग्रह को प्रसन्न करने हेतु
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की पीड़ा हेतु चमत्कारी तुरंत फल देने वाले उपाय बताए गए हैं यहां पर आप लोगों को गुरु ग्रह को प्रसन्न करने हेतु एवं अतिशीघ्र शुभ फल प्राप्त करने हेतु सरल सिद्ध आसान तुरंत फलदाई उपाय हम लेकर आए हैं बताया गया है कि यदि गुरु ग्रह से संबंधित किसी भी प्रकार की कैसी भी पीड़ा दुःख कष्ट आदि क्यों नहीं हो इस उपाय को नियमित समयानुसार करने से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है गुरुवार के दिन किसी भी गुरू कुल या अपने नजदीक किसी विद्यालय में 21 बच्चों को कापी कलम किताब अपनी सामर्थ्यानुसार अवश्य दान वितरण करना चाहिए 21 गुरुवार नियमित लगातार जो यह दान प्रक्रिया को करता है गुरु ग्रह का बढ़े से बढ़ा दोष भी दूर हो जाता है। तो हम उम्मीद करते है कि आप अवश्य ही गुरु ग्रह जनित इस जानकारी पर अवश्य ही अमल करेंगे। पसंद आए तो आगे शेयर भी जरूर करें धन्यवाद अधिक जानकारी हेतु मुझे क्लिक करें

