चन्द्र ग्रह की रूचि गुण प्रवृत्ति मिलती है आपसे। चन्द्र ग्रह प्रभावित है तो जरूर पढ़ें।

ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रह को मन का स्वामी एवं माता का कारक का गया है चंद्रमा के बारे में पद्म पुराण में बताया गया है कि ब्रह्मा के पुत्र महर्षि अत्रि ने अपने पिता ब्रह्मा की आज्ञा अनुसार सृष्टि उत्पन्न करने के लिए अनुत्तर नामक तप किया था तप पूर्ण होने पर अत्रि के नेत्रों से जल की बूंद गिरी उन आंसुओं के कणों से सारा जगत अलौकिक प्रकाश से जगमगा उठा उस समय दिशाओं में स्त्री रूप में उपस्थित होकर उन आंसुओं को पुत्र प्राप्ति की कामना से स्वयं ग्रहण कर लिया लेकिन धारण न रख सकने के कारण त्याग दिया ।

ब्रह्मा जी द्वारा प्राप्त है चन्द्रमा नाम

दिशाओं द्वारा परित्यक्त गर्भ को ब्रह्मा जी ने एक युवा पुरुष के रूप में बदल दिया उसके उपरांत उस युवक को ब्रह्म लोक में अपने साथ ले गए और उसका नाम चंद्रमा रख दिया ब्रह्मलोक में देवताओं ऋषि-मुनियों गंधर्व अप्सराओं द्वारा स्तुति किए जाने पर चंद्रमा के तेज में वृद्धि हो गई इस देश के पारित होने पर पृथ्वी पर अनेकानेक प्रकार की दिव्य औषधियों की उत्पत्ति हुई। प्रचेताओं के पुत्र प्रजापति दक्ष ने प्रभावित होकर अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा के साथ कर दिया इसके बाद चन्द्रमा ने राजसूय यज्ञ करके ऐश्वर्य और यश की उपलब्धि करी चंद्र ग्रह की 27 पत्नियां ही 27 नक्षत्रों के नाम से जानी जाती है ।

अन्य पौराणिक कथा अनुसार इस प्रकार मानी जाती है उत्पत्ति

इसी प्रकार एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार पितामह ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न किए गए आदि पुरुष मनु की 3 कन्याएं थी इनमें से देव होती नामक दूसरी कन्या का विवाह ब्रह्म पुत्र महर्षि कदम के साथ हुआ था इन दोनों के सहयोग से नौ कन्याओं का जन्म हुआ जिनमें से अनुप्रिया नामक कन्या का विवाह महर्षि अत्रि के साथ हुआ कालांतर में अनुप्रिया से तीन पुत्रों का जन्म हुआ दत्तात्रेय दुर्वासा और अत्रि। अत्रि का पुत्र होने के कारण चंद्रमा को आत्रेय भी कहा जाता है
चंद्र ग्रह को काल पुरुष काम मन माना गया है

महत्वपूर्ण विशेषताएं जो प्रभावित करती है व्यक्ति को

इसका वर्ण सफेद, रूप सुंदर, आकृति स्थूल, स्वभाव चंचल, प्रकृति कफ,गुण सत्व, स्वाद नमकीन कद लंबा, शरीर में का रक्त रक्त, जाति वैश्य, गोत्र अत्री, वाहन हरिन, समिधा पलास, ।
दिशा वायव्य, देवता वरुण, स्वामी कर्क राशि का, देश यमुना तटवर्ती, ऋतु वर्षा, बली रात्रि में, क्रीडा स्थल जलाशय, स्थान जलाशय, गीली भूमि, ।
शरीर में प्रभाव गले से हृदय तक, राज्य अधिकार रानी, रुचि ज्योतिष शास्त्र, भाग्योदय काल 24 वर्ष से 25 वर्ष के मध्य, निसर्ग बल शुक्र से अधिक बली, पराभव बुध से पराजित, जड़ी खिरनी की जड़, रत्न मोती, उपरत्न चंद्रमणि।
दान पदार्थ सफेद वस्त्र, चावल, बतासे, मोती, सफेद गाय, कपूर, घी, आदि दान का समय संध्या समय।

चंद्र ग्रह की शुभ स्थिति जातक को देती है यह अलौकिक गुण

चन्द्र ग्रह यदि जन्म कुंडली में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति सात्विक, विनम्र ,मधुर भाषी, बुद्धिमान, समर्थन, कल्पना, प्रिय शांत, अनुभूतियों और भावनाओं को क्रियात्मक एवं रचनात्मक रूप देने वाला नेतृत्व प्रिय, भ्रमणशील, राज भक्त, एवं शारीरिक तौर पर स्वस्थ होता है।लेकिन यदि चंद्र ग्रह चंद्र कुंडली में अशुभ स्थिति में हो तो तामसी, हठी, विश्वासघाती, चंचल, लालची, स्वार्थी, आलसी, रोगी, स्त्री के अनुसार चलने वाला एवं बिल्कुल भी सामाजिक नहीं होता है।

इन क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करता है चंद्र प्रभावित व्यक्ति

चंद्र ग्रह यदि जन्मकुंडली में बलि हो तो व्यक्ति की रूचि ज्योतिष शास्त्र, चित्रकारी, ललित कला, काव्यशास्त्र, फोटोग्राफी, नाट्यशास्त्र, संगीत व रत्न विज्ञान में रुचि रहती है इसलिए चंद्र ग्रह प्रभावित व्यक्ति कलाकार अच्छे ज्योतिषी अच्छे चित्रकार, kavi, फोटोग्राफर, रत्न विशेषज्ञ, नाटककार, संगीतज्ञ, अभिनेता आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं चंद्र ग्रह यदि जन्मकुंडली में पूर्ण बली हो तो अपना सर्वश्रेष्ठ फल 24 से 25 वर्ष के बीच में जातक को देता है चंद्र ग्रह से संबंधित यह जानकारी यदि आप लोगों को पसंद आए तो जरूर आगे बढ़ाकर शेयर करिए धन्यवाद चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने का आसान उपाय क्लिक कर जानिए

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